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गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी शैलजा के हालिया दौरे और कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाले संबोधन के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से संगठनात्मक कमजोरी और लगातार चुनावी हार से जूझ रही कांग्रेस में अब नई ऊर्जा दिखाई देने लगी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह उत्साह आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचा पाएगा।

जिला मुख्यालय गोपेश्वर में आयोजित बैठक में शैलजा ने साफ कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दम पर लड़ा जाएगा। उनके इस बयान के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि कार्यकर्ता बूथ स्तर तक सक्रिय हुए तो पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, भर्ती घोटाले और स्थानीय समस्याएं ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कांग्रेस सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं और पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को भी कांग्रेस लगातार उठाती रही है। ऐसे में यदि पार्टी इन मुद्दों को जनता तक मजबूती से पहुंचाने में सफल रहती है तो चुनावी माहौल बदल सकता है।

हालांकि कांग्रेस के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पार्टी अभी भी गुटबाजी और नेतृत्व के संकट से पूरी तरह उबर नहीं पाई है। पिछले चुनावों में कई वरिष्ठ नेताओं के दल बदलने का असर संगठन पर पड़ा था। वहीं भाजपा मजबूत संगठन, संसाधनों और सत्ता के अनुभव के साथ मैदान में है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल जोश से चुनाव नहीं जीते जाते। कांग्रेस को यदि सत्ता तक पहुंचना है तो उसे संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा और जनता के बीच भरोसेमंद विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना होगा।

फिलहाल इतना जरूर माना जा रहा है कि शैलजा के दौरे ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने का काम किया है। यदि यह ऊर्जा चुनाव तक बरकरार रही तो उत्तराखंड की राजनीति में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

 

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