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गोपेश्वर (चमोली)। आखिर तीन माह बाद प्रकृति ने मेहरवानी की है। इसके तहत शुक्रवार को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात तथा निचली घाटी वाले क्षेत्रों में बारिश के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।

दरअसल अक्टूबर माह से मौसम ने मिजाज नहीं बदला। इसके चलते लोग सर्द भरी हवाओं के चलते कडाके की ठंड का सामना कर रहे थे। बारिश तथा  बर्फवारी न होने से लोगों को भविष्य की चिंता सताने लगी थी। मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को बर्फवारी तथा बारिश का अलर्ट जारी किया था। इस तरह मौसम विज्ञान विभाग का पूर्वानुमान सच निकला और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फवारी तथा बारिश से जनजीवन पहले ही दिन बेहाल हो गया। बफवारी तथा बारिश का असर शुक्रवार को ब्याह शादियों पर भी साफ तौर पर देखने को मिला। इसके चलते निचली घाटी वाले क्षेत्रों में बारिश के बीच शादी समारोह संचालित हुए। हिमालय से सटे गांवों में बर्फवारी तथा बारिश के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त होकर रह गया है। बारिश तथा बर्फवारी के कारण लोग घरों में ही सिमट कर रह गए। कई इलाकों में पशुओं के लिए चारा जुटाने की समस्या भी खड़ी हो गई है।

चीन सीमा से सटी नीती तथा माणा घाटियां भी बर्फवारी की जद में आ गई है। सीमा चौकिंयों पर तैनात सुरक्षा प्रहरी भी बर्फवारी की चपेट में आने के बावजूद सुरक्षा में जुटे हुए हैं। रूद्रनाथ, चोपता, तुंगनाथ, अनसूया देवी, मोहनखाल, नैल नौली, पाणा इराणी तथा दूधातोली की पहाड़ियां हिमपात से लकदक हो गई है। खबर है कि बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, हिमक्रीडा केंद्र औली में भी बर्फवारी होने से ठंड ने जोरदार दस्तक दे दी है। बर्फवारी तथा बारिश से प्रकृति प्रेमियों के चेहरे खिल उठे हैं। काश्तकार बारिश तथा बर्फवारी को शुभ संकेतों के रूप में देख रहे हैं। पिछले तीन माह से बारिश तथा बर्फवारी न होने से लोग मायूस होकर भविष्य की चिंता में डूब गए थे। बसंत पंचमी को बर्फवारी तथा बारिश को लोग भविष्य के लिए अच्छे संकेत मान कर चल रहे हैं।

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