जोशीमठ। समुद्रतल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सतोपंथ झील में 8 सदस्य जापानी दल घोड़े खच्चरों के साथ पहली बार सतोपंथ पहुंचे हैं आज से पहले कभी भी कोई भी दल यहां घोड़े खच्चर से यहाँ पहुँच पाया है सभी यात्री और पर्यटक पैदल ही यहां ट्रैकिंग कर पहुंचते है, हर साल हजारों श्रदालु और पर्यटक यहां आध्यत्मिक शांति और उस ईश्वर के अहसास के लिए यहाँ पहुँचते है,यहाँ ज्यादा साधु संत और आध्यात्मिक लोग ही यात्रा करते है,महाभारत में पांडव इसी रास्ते स्वर्ग गए थे यह झील प्राकृतिक झीलों में से एक है धार्मिक लिहाज के साथ ही प्राकृतिक सौंदय के वजह से विश्व के पर्यटन मानचित्र में दर्ज है इस 5तिकोने झील मेंएकादशी के दिन ब्रह्मा, विष्णु महेश स्नान करते है, काल के बाद पहली बार जापान के 8 पर्यटक यहां पहुँचे, जापानी पर्यटको की माने यहदुनिया का इकलौता स्थान है जहाँ पर हम ईश्वर का अहसास होता है और यह दुनिया के लिए आध्यात्मिक शांति का केंद्र है, उन्होंने यहाँ पर भगवान का ध्यान और योग किया, इनको यहाँ इतना दिव्य अहसास हुआ उनके खुसी के मारे आंसू आ गए, उन्होंने कहा हमने इस स्थान के बारे में सुनाथा पहले भी यहाँ आने का प्रयास किया पहुँच नही पाये, लेकिन इस बार यहाँ पहुचकर बहुत खुसी हुई,
ग्रुप लीडर ग्रांट एडवेंचर जोशीमठ राजेन्द्र मर्तोलिया और गाइड दिनेश का कहना है कि यह आठ सदस्यीय दल कोरोना काल के बाद पहली बार जापानी दलसतोपंथ सरोवर किया ,दल ने सतोपंथ सरोवर पहुचकर विश्व जन कल्याण हेतु हवन यज्ञ भी किया, इसमे ये दल बिना पोर्टर के पहली बार खच्चर से सतोपंथ पहुँचे।
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