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गोपेश्वर (चमोली)। शिक्षिका कुसुमलता गडिया की, जिद जुनून, मेहनत और ललक नें शिक्षा के मंदिर की तस्वीर बदल कर रख दी है। शिक्षा का वीणा मॉडल आज लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

22 सालों से जला रही है शिक्षा की अलख

चमोली जिले के थराली ब्लाक के जोलाकोट (बुढजोला) निवासी और शिक्षिका कुसुमलता गडिया की तरह यदि सभी शिक्षक शिक्षिकायें अपने विद्यालय में गुणवत्तापरक शिक्षा को लेकर कुछ अभिनव प्रयोग करें तो सूबे की शिक्षा व्यवस्था पूरे देश मे सबसे अब्बल पायदान पर होगी। कुसुमलता गडिया वर्तमान में चमोली जिले के पोखरी ब्लॉक राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय वीणा में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है। वर्तमान समय में पहाड के दूरस्थ गांव में स्थित ये सरकारी विद्यालय लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पांच साल पहले छात्र संख्या बेहद कम होनें के कारण जिस विद्यालय पर बंदी की तलवार लटकी हुई थी। 2015 में इस विद्यालय में तैनात हुई शिक्षिका कुसुमलता गडिया नें न केवल अपनी जिद, जुनून और मेहनत से अभिभावकों का विश्वास जीता अपितु धीरे-धीरे विद्यालय की छात्र संख्या में भी बढ़ोत्तरी होती गयी। वर्तमान में विद्यालय बेहतर शिक्षा और अन्य गतिविधियों के लिए जनपद ही नहीं प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बना पानें में सफल साबित हुआ है। शिक्षिका कुसुमलता गडिया की जिद, मेहनत और ललक का परिणाम है कि लोगों का भरोसा सरकारी स्कूल के प्रति बढ़ा है। पहाड़ के गांव में स्थित यह विद्यालय शहरों के नामी गिरामी विद्यालयों से हर क्षेत्र में मीलों आगें हैं।

गुणवत्तापरक शिक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष जोर

पहाड़ों के गांवों में आज भी नौनिहालो को गुणवत्तापरक शिक्षा मय्यसर नहीं हो पाती है। जिस कारण से पहाड से लोगों का सबसे ज्यादा पलायन शिक्षा के लिए हुआ है। लेकिन शिक्षिका कुसुमलता गडिया के प्रयासों से आज  राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय वीणा गुणवत्ता परक शिक्षा का केंद्र बना हुआ है। शिक्षिका नें विद्यालय में लर्निंग कॉर्नर, पेंटिंग, टीएलएम, ऑनलाइन क्लासेज, वाल पेंटिंग, पोस्टर अभियान के जरिए छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता परक शिक्षा से जोडा है। शिक्षिका कुसुमलता गडिया का मानना है कि शिक्षा बेवजह थोपी नहीं जानी चाहिए बल्कि रूचिकर शिक्षा से ही छात्रों को बेहतर शिक्षा दी जा सकती है। इसके अलावा विद्यालय में शिक्षा के लिए स्वस्थ माहौल होना बेहद जरूरी है। शिक्षिका की ओर से समय-समय पर विद्यालय में अन्य शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी संचालित की जाती है। इसके पीछे उद्देश्य है कि छात्रों को एक बेहतर मंच मिले और वे खुलकर सामने आयें जिससे उन्हें खुद पर विश्वास और भरोसा हो सकें। विगत दिनों विद्यालय में आयोजित प्रवेशांक/स्वागत दिवस और पोषण दिवस के आयोजन ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया था। कोरोना काल में कुसुमलता गडिया नें स्कूल के छात्र छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जबकि विभिन्न राज्यों के विद्यालयों के लिए पाठ्यक्रमों का ऑनलाइन लर्निंग वीडियो भी बनाई। ताकि छात्रों को पढने के लिए बेहतर मौका मिले। बेहतर शिक्षा के लिए कुसुमलता गडिया को विभिन्न अवसरों पर राज्य से लेकर राष्टीय स्तर तक दर्जनो सम्मान भी मिल चुके हैं। लेकिन वे कहती है कि मैं अपने कार्य और जिम्मेदारी का भलीभांति निर्वहन कर रही हूं जो सबसे बडा पुरस्कार है। आत्मसंतुष्टि ही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

स्कूल की बेजान दीवारों को ’क्यू आर कोड’ के जरिए शिक्षा के मॉडल की देश में सराहना

कोरोना काल को कैसे अवसर में बदला जा सकता है ये सीखना है तो राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय वीणा की शिक्षिका कुसुमलता गडिया से सीखा जा सकता है। जिन्होंने लॉकडाउन में दिन रात एक करके, इंटरनेट की खाक छानकर स्कूल की बेजान दीवारों पर ’क्यू आर कोड’ के जरिए शिक्षा की एक नयीं परिभाषा गढी है। वीणा उत्तराखंड का पहला विद्यालय होगा जहां क्यू आर कोड का प्रयोग शिक्षण को रूचिकर और सुगम बनाने में किया गया। शिक्षा के वीणा मॉडल की हर जगह प्रशंसा हो रही है।

ये होता है क्यू आर कोड

अधिकतर विद्यालयों की दीवारों पर बने चित्र मात्र चित्र ही बनकर रह जाते और उससे संबंधित जानकारियों से छात्र अनभिज्ञ रह जाते हैं या बहुत कम जानकारी उस चित्र से संबंधित छात्रों के पास होती है। लेकिन अब विद्यालय की प्रत्येक शिक्षण/सीखने की सामग्री (टीएलएम) और चित्रों पर क्यू आर कोड लगाया गया है जिसे गुगल लेंस से स्केंन करते ही उस चित्र से संबंधित विडियो हमारे मोबाइल पर शुरू हो जायेगी। क्यू आर कोड से शिक्षण रूचिकर बनेगा साथ ही बाहरी ज्ञान से हम छात्रों को जोड़ सकते हैं। विद्यालय के प्रत्येक सामान पर भी क्यू आर कोड लगाया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दीक्षा

शिक्षा के वीणा मॉडल में न केवल आखर ज्ञान और गुणवत्ता परक शिक्षा मिलती है अपितु यहां पर सामूहिक सहभागिता के जरिए छात्रों और ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दीक्षा भी दी जाती है। शिक्षिका कुसुमलता गडिया की ओर से प्रत्येक सप्ताह और विशेष पर्वों पर विद्यालय प्रांगण से लेकर गांव, पनघट, जल स्रोतों सहित विभिन्न जगहों पर स्वच्छता अभियान चलाया जाता है वहीं पर्यावरण संरक्षण की महत्ता को लेकर विद्यालय व गांव में समय-समय पर जागरूकता अभियान और पौधरोपण किया जाता है। विगत दिनों पेड वाले गुरूजी धन सिंह घरिया के सहयोग और प्रोत्साहन से विद्यालय परिसर और गांव में वृहद् पौधरोपण किया गया था। इस दौरान महिलाओं ने पारम्परिक लोकगीतों के संग पौधरोपण को सफल बनाया गया था। इसके अलावा विद्यालय में स्थानीय जड़ी बूटियों का एक संग्रह किया गया है जिस पर भी क्यूआर कोड लगाया गया है।

शिक्षा के जरिए ही समाज में बदलाव लाया जा सकता हैः कुसुमलता गडिया

बकौल कुसुमलता, मेरे कार्य से जब मेरे छात्रों के चेहरे पर मुस्कान होती है तो तब जाकर सुकून मिलता है। शिक्षा के जरिए समाज में बदलाव लाया जा सकता है। शिक्षक की समाज निर्माण में अहम भूमिका होती है। इसलिए हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है कि हम कैसी शिक्षा देते हैं। मैं विगत 22 बरसों से नौनिहालो को शिक्षा दे रही हूं। मेरे लिये मेरे परिवार से भी बढ़कर मेरा विद्यालय है। आज का दौर डिजिटल शिक्षा का दौर है, इसलिए चुनौती बहुत बढ गयी है। हमें हर रोज अपडेट होना पडेगा। मुझे खुशी है कि मुझे हर स्तर पर सहयोग मिला है चाहे वो भागचंद केशवानी, शिक्षक सत्येन्द्र भण्डारी, पेड़ वाले गुरुजी धन सिंह घरिया हो या हमारे शिक्षा महकमे के अधिकारी, मेरे सहयोगी शिक्षक और अभिभावक, ग्रामीण सबने मुझे हमेशा प्रोत्साहन दिया। मेरी प्रेरणा मेरी मां, बेटी और परिवार हैं जिनके सहयोग और भरोसे के बिना कुछ भी संभव नहीं था। आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं तो बहुत सुकून और खुशी मिलती है कि मैं कुछ कर सकी हूं। वे कहती हैं कि हर माता-पिता को बेटे ही नहीं बल्कि बेटियों को भी बेहतर शिक्षा देनी चाहिए। आज बेटियां भी ओलम्पिक से लेकर विशाल नीले आसमान तक हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही है। उन्हें ऊंची उडान भरने दो। शिक्षा पर बेटा और बेटी दोनों का बराबर अधिकार है। मुझे खुशी है कि पहाड़ में बेटियों को भी बेटे के बराबर अधिकार और अवसर दिया जा रहा है।

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By admin

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