गोपेश्वर (चमोली)। वाण में नंदा की डोलियों और छंतोलियों का मिलन अब भावुक विदाई में बदलने जा रहा है। गुरुवार से नंदा की बड़ी जात आबादी छोड़कर उस हिमालय की ओर बढ़ चली है, जहां न गांव हैं, न बस्तियां और न ही आसान रास्ते। 12 साल बाद हो रही इस यात्रा में वाण के बाद श्रद्धालुओं के सामने निर्जन हिमालयी पड़ावों की कठिन डगर होगी। ग्लेशियर से रास्ते बदल गए हैं और कई हिस्सों में पैदल आवाजाही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
वाण से आगे यात्रा का सबसे कठिन चरण शुरू होगा। प्रशासन की एडवांस टीम ने होमकुंड तक के रास्ते का निरीक्षण कर कई हिस्सों को आवाजाही के लिहाज से चुनौतीपूर्ण पाया है। लंबे समय से इन रास्तों पर आवाजाही नहीं होने के कारण कई जगह रास्ते व्यवस्थित नहीं हैं।
बड़ी जात का मार्ग वाण से गैरोली पाताल, बेदनी बुग्याल, पातर नचैणियां, रूपकुंड, ज्यूनरागली, शिलासमुद्र होते हुए होमकुंड तक है। वाण से गैरोली पाताल की दूरी करीब 10 किमी, गैरोली से बेदनी तीन किमी, बेदनी से पातर नचैणियां छह किमी, पातर नचैणियां से रूपकुंड सात किमी, रूपकुंड से शिलासमुद्र 15 किमी और शिलासमुद्र से होमकुंड करीब 16 किमी है।
ग्लेशियर खिसकने के कारण कई हिस्सों में पुराना रास्ता प्रभावित हुआ है। इससे श्रद्धालुओं को चढ़ाई-उतराई और रास्ता बदलकर करीब 30 किमी अतिरिक्त पैदल चलना पड़ सकता है। खासकर शिलासमुद्र से होमकुंड के बीच का रास्ता सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वर्ष 1988, 2000 और 2014 में राजजात के दौरान इन रास्तों को पहले से व्यवस्थित किया गया था। इस बार बड़ी जात के लिए ऐसी व्यापक तैयारियां नहीं हो पाई हैं। नंदा देवी राजजात के वर्ष 2027 में होने और इस वर्ष बड़ी जात निकलने को लेकर बनी स्थिति का असर भी तैयारियों पर पड़ा है।
होमकुंड से लौटते समय भी यात्रियों को कठिन रास्ते से गुजरना होगा। वापसी में होमकुंड से चांदनीघाट होते हुए सुतोल तक करीब 27 किमी की दूरी तय करनी होगी। पर्यटन विभाग ने भी हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रखने की सलाह दी है।
इसके बावजूद नंदा भक्तों में उत्साह बना हुआ है। बड़ी जात की डोली और छंतोलियों के वाण में होने के दौरान ही कई श्रद्धालु गैरोली पाताल और बेदनी पहुंच चुके हैं। अब गुरुवार से निर्जन हिमालयी क्षेत्र में यात्रा का कठिन दौर शुरू होगा, जहां श्रद्धालुओं को मौसम, रास्ते और ऊंचाई को देखते हुए विशेष सावधानी बरतनी होगी।
