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अमित शाह और मुख्यमंत्री धामी ने राज्योत्सव में किया सम्मानित

प्रत्येक बच्चे को पदक, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रुपये की धनराशि

देहरादून। साहस और सूझबूझ से दूसरों की जिंदगी बचाने वाले उत्तराखंड के छह बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें चमोली जिले के तीन बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने स्कूल परिसर में घुसे भालू के हमले के दौरान अदम्य साहस दिखाते हुए अपने साथी विद्यार्थियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। शुक्रवार को परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बच्चों को पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। प्रत्येक बच्चे के खाते में 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि भी डीबीटी के माध्यम से भेजी गई।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार शुरू किए गए इस पुरस्कार के लिए राज्यभर से प्राप्त आवेदनों में छह बच्चों का चयन किया गया। इनमें चमोली के तीन तथा चम्पावत, देहरादून और टिहरी जिले के एक-एक बच्चे शामिल हैं।

भालू के हमले में चमोली के तीन बच्चों ने दिखाई बहादुरी

चमोली जिले की दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को 22 दिसंबर 2025 को जीआईसी यूपीएस हरिशंकर के परिसर में भालू के हमले के दौरान साहस दिखाने के लिए सम्मानित किया गया। सुबह करीब साढ़े नौ बजे विद्यालय परिसर में घुसे भालू ने कक्षा छह के छात्र आरव सिंह पर हमला कर दिया। इस दौरान आरव ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया। कक्षा आठ की छात्रा दिव्या ने भालू का पीछा कर आरव को बचाने का प्रयास किया और उसे सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने में मदद की। वहीं दीपिका ने तत्परता दिखाते हुए नौ अन्य विद्यार्थियों को कक्षा सात के कमरे में पहुंचाकर सुरक्षित किया।

नदी में बहती बालिका को बचाया

चम्पावत की माया को पांच अगस्त 2025 को नदी के तेज बहाव में फंसी बालिका की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने पर एक बालिका तेज धारा में बहने लगी थी। माया ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाया। इस दौरान वह स्वयं भी घायल हो गई थीं।

17 लोगों को किया सतर्क, बच्ची को भी बचाया

देहरादून की आराध्या ने दो जून 2026 को बादल फटने के बाद अचानक आए मलबे और पानी के खतरे को भांपते हुए घर में मौजूद सभी 17 लोगों को सतर्क कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। उन्होंने तीन वर्षीय बच्ची को भी पानी के तेज बहाव से बचाया।

तेज रफ्तार वाहन से बुजुर्ग की बचाई जान

टिहरी गढ़वाल की श्वेता को 30 जनवरी 2025 को सड़क पर एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। बुजुर्ग लाठी के सहारे सड़क पर चल रहे थे, तभी सामने से तेज रफ्तार वाहन आ गया। श्वेता ने तत्काल उनका हाथ पकड़कर उन्हें सड़क किनारे सुरक्षित पहुंचाया।

सरकार की ओर से शुरू किए गए इस पुरस्कार का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में असाधारण साहस, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता दिखाने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करना है। सम्मानित बच्चों की कहानियां दूसरे बच्चों के लिए भी साहस और जिम्मेदारी की प्रेरणा बनेंगी।

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By admin

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