गोपेश्वर (चमोली)। आखिरकार सेना के जवानों ओर गुरूद्वारा के सेवादारों के अथक प्रयासों से पैदल रास्ते से बर्फ ह टजाने से हेमकुंड साहिब परिसर तक का रास्ता तैयार हो गया है। इसके चलते अब टीम हेमकुुंड साहिब में ही डेरा डाल कर परिसर से बर्फ को हटाने की मुहिम में जुटेगी।
दरअसल हेमकुंड साहिब मार्ग को आवाजाही के लिए सुगम व सुरक्षित बनाने के लिए हर साल भारतीय सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9माउंटेन ब्रिगेड) की टीम तथा गुरूद्वारा हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सेवादार ही हर साल हेमकुंड साहिब तक का पैदल रास्ता तैयार करते हैं। पैदल मार्ग पर बर्फवारी के चलते ग्लेशियर को काट कर रास्ता बनाना और फिर रास्ते से बर्फ को हटाना किसी चुनौती से कम नहीं रहता है। विपरित मौसम के बीच बर्फ को हटा कर रास्ता तैयार करना कोई आसान काम भी हीं है। सेना के जवानों तथा सेवादारों के अथक प्रयासों से आखिरकार हेमकंुड साहिब मार्ग से बर्फ को हटाकर आवाजाही सुगम कर ली गई है। दोनों टीमे बर्फ को हटा कर हेमकुंड साहिब परिसर पहुंच गई है। अब दोनों टीमें हेमकुंड साहिब में ही रह कर परिसर से बर्फ हटाने के मोर्चे पर डटेंगी।
बताया जा रहा है कि टीम अब हेमकुंट साहिब से अटलाकोटी ग्लेशियर प्वाइंट तक नीचे की ओर ट्रैक को चैड़ा करने में भी जुटेगी। इससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम व सुरक्षित बनेगी। फिलहाल दोनों टीमें हेमकुंड साहिब में ही डेरा डालेंगी। अब तक उन्हें बर्फ काट कर वापस घांघरिया में वापसी करनी पड़ रही थी।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ने भारतीय सेना तथा सेवादारों के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि दोनों टीमों के संयुक्त प्रयासों से हेमकुंड साहिब तक आवाजाही संभव हो पाई है। उच्च हिमालय में 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिखों का प्रमुख तीर्थ स्थल है। हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को खुलने जा रहे है। इसी से सटे परिसर के समीप ही हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोकपाल लक्ष्मण मंदिर भी है। लक्ष्मण मंदिर के कपाट इस बार 22 मई को खुलने जा रहे हैं। इस तरह इस पैदल मार्ग से बर्फ हटने से लोकपाल लक्ष्मण मंदिर जाने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।

