छह मांगों पर शासन की चुप्पी से नाराज मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी
गोपेश्वर (चमोली)। वर्ष 2006 से लंबित कलेक्ट्रेट ढांचे के पुनर्गठन समेत छह मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों में नाराजगी जताई है। उत्तराखंड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर लंबित मांगों के निस्तारण की मांग की है।
जिलाध्यक्ष राकेश सिंह नेगी और जिला मंत्री गिरिजा प्रसाद कोठियाल ने कहा कि शासन और राजस्व परिषद स्तर पर बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कलेक्ट्रेट ढांचे का पुनर्गठन कर इसे विशेष कार्यालय अथवा विभाग का दर्जा देने की मांग की जा रही है। कनिष्ठ सहायक की शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक करने और विभिन्न पदों के ग्रेड पे में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कनिष्ठ सहायक के लिए 2800, वरिष्ठ सहायक के लिए 4200, प्रधान सहायक के लिए 4600, प्रशासनिक अधिकारी के लिए 4800, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के लिए 5400 और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के लिए 6600 ग्रेड पे की मांग की गई है।
संघ ने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को तहसीलदार का लिंक अधिकारी घोषित करने, नायब तहसीलदार के पदों पर पदोन्नति के लिए कलेक्ट्रेट संवर्ग का 10 प्रतिशत कोटा तय करने तथा वरिष्ठ और मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के रिक्त पदों पर समयबद्ध पदोन्नति की मांग भी उठाई है। इसके अलावा पारस्परिक और निजी अनुरोध के आधार पर लंबित स्थानांतरण आवेदनों का निस्तारण करने की मांग की गई है।
जिलाध्यक्ष और जिला मंत्री ने उच्च न्यायालय के रिट पिटीशन में 29 अगस्त 2018 को पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी संगठनों की मांगों के निस्तारण के लिए समिति गठित कर तीन माह में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मांगें लंबित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से शासन और राजस्व परिषद को आवश्यक निर्देश जारी कर समाधान कराने का अपील की है।
