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  • 18 साल गुजर जाने के बाद भी गांवों तक नहीं पहुंच पायी सड़क
  • नीती घाटी के ग्रामीण जनांदोलन करने का बना रहे मन

गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने का दावा कर रही है वहीं सरकार के दावों की हकीकत तक सामने आ जाती है जब ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर आंदोलन करने की धमकी देते हुए नजर आते है। चमोली जिले के जोशीमठ विकास खंड के नीती घाटी के कई गांवों ग्रामीण आज भी सड़क की बाट जोह रहे है। ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की सामग्री कई-कई किलोमीटर पैदल लाद कर गांव तक पहुंचाने के लिए मजबूर है।

कागा गरपक के प्रधान पुष्कर सिंह राणा बताते हैं कि 2005 मे टीएसपी योजना के अंतर्गत कागा लग्गा द्रोणागिरी मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था। जिसकी कुल लम्बाई 6.6 किलोमीटर थी। जबकि मुख्य सड़क से द्रोणागिरी गांव की दूरी नौ किलोमीटर है। 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस मोटर मार्ग पर केवल 4.10किमी ही कार्य हो पाया। अभी भी ग्रामीणों को अपने मूल गांव पहुंचने मे पांच किलोमीटर का रास्ता पैदल चलना पड़ता है। जो कि बहुत ही कठिन कार्य है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग व कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग कितनी तेजी से सरकार की योजना प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ना पर कार्य कर रही है।

उनका कहना है कि ऐसा नही है कि सिर्फ नीती घाटी मे एक ही मोटर मार्ग कागा लग्गा द्रोणागिरी मोटर मार्ग का हाल ऐसा हो। सीमान्त जोशीमठ व नीती घाटी के अंतर्गत ऐसे कई गांव है, जिन पर मोटर मार्ग का कार्य कई वर्षों से विभाग की हीला हवाली और ठेकेदार की गलती से या तो प्रारम्भ नही हो पाया या फिर प्रारम्भ हुआ तो आधा अधूरे पर अटका हुआ है। वे कहते है कि इसी योजना व इसी वर्ष की स्वीकृत मोटर मार्ग सुराइथोटा से तोलमा गांव का भी हैं जिसकी स्वीकृति 2005 मे हुई थी, जिसकी कुल लम्बाई 4.5 किमी थी। लेकिन अभी तक सिर्फ 1.5 किमी ही मोटर मार्ग बन पाया।अभी भी ग्रामीणों को अपने गांव तक तीन किमी  पैदल चलकर पहुंचना पड़ता है। उनका आरोप है कितोलमा मोटर मार्ग का दुर्भाग्य यह रहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से अपने चहेते ठेकेदारो को कार्य दिया गया। ठेकेदार की ओर से कुछ अंश काम किया गया उसके बाद कार्य से अधिक पेमेंट ले के कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया जो कि आज तक जस का तस है। विभाग ने वर्तमान तक ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नही की, जो कि एक सोचनीय विषय है।

ऐसा ही सुराइथोटा से सुकी भल्लागांव मोटर मार्ग का हाल है। ये भी 2005 की स्वीकृत मोटर मार्ग है। लेकिन 18 वर्ष बीत जाने के बाद पिछले वर्ष इस मोटर मार्ग पर निविदा लगी। निविदा लगने के बाद मशीन ने 20-30 मीटर पहाड़ कटिंग के बाद लगभग 6-7 महीनों से इस पर भी कार्य रुका पड़ा है। इसके अलावा आपको लौंग सगरी, फागती पगरासु, जुवाग्वाड, पैंग-मुरुण्डा ऐसे मोटर मार्ग है जिनकी स्वीकृति भी 2005 मे टीएसपी के अंतर्गत हुई थी लेकिन 18 वर्ष बीत जाने के बाद आज तक इन पर धरातलीय सर्वेक्षण तक नही हुआ है। इससे जाहिर होता है कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी का हो। इससे कोई फर्क नही पड़ता मगर यहां तो सिस्टम ही खराब है। जो सही तरीके से काम करवाने में विफल है। उन्होंने कहा कि यदि नीती घाटी के तमाम अधूरे पड़े मोटर मार्गों पर निर्माण कार्य शीघ्र शुरू नहीं किया जाता है तो नीती घाटी के ग्रामीणों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

 

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