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गोपेश्वर (चमोली)।  उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के चलते तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का रेला उमड़ जाने से ऐसा लग रहा है मानो समूचा भारत उत्तराखंड की फिजाओं में रम गया हो।

दरअसल उत्तराखंड में बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री तथा गंगोत्री धामों के कपाट खुलते के पश्चात यात्रा शुरूआती दौर में धीमी रही किंतु अब चारधाम यात्रा ने जोरदार रफ्तार पकड़ ली है। इसके साथ ही अब सिखों के प्रमुख धाम हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने से भी तीर्थयात्रा चरम पर पहुंच गई है। देश विदेश के तीर्थयात्री और पर्यटक इन दिनों उत्तराखंड के धामों में पहुंच कर भगवान के दर्शनों का पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। मई माह के शुरूआती दौर से ही तीर्थाटन और पर्यटन आधारित कारोबारी गतिविधियां भी परवान चढ़ने लगी है। हालात इस कदर दिखाई दे रहे हैं कि ऋषिकेश में तीर्थयात्रियों को जाम के झाम से हलकान होना पड़ रहा है। इसी तरह के हालातों से उत्तराखंड के लोगों को भी गुजरना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा मार्गों के प्रमुख नगरों में भी जाम ने लोगों को हलकान कर रख दिया है। सभी धामों में तीर्थयात्रियों का रेला उमड़ जाने के चलते ऐसा लग रहा है मानो समूचा भारत उत्तराखंड की फिजाओं में रम गया हो।

ऋषिकेश-बदरीनाथ हाइवे पर रिवर राफ्टिग के चलते भी साहसिक पर्यटकों का जमवाड़ा देखने को मिल रहा है। नैनीताल तथा मसूरी में भी पर्यटकों का तांता लगा हुआ है। इसी तरह के हालात पर्यटक स्थलों पर भी देखने को मिल रहे हैं।

बताते चलें कि जम्मु-कश्मीर पहले पर्यटकों के लिए स्वर्ग माना जाता रहा है। इसके चलते पर्यटक जेएंडके में डेरा डाल देते थे। आंतकी गतिविधियों के कारण पर्यटकों ने जेएंडके को अलविदा कर दिया है। इसके चलते पर्यटकों की दूसरी पसंद हिमाचल तथा उत्तराखंड बन गई है। उत्तराखंड तो तीर्थाटन का भी हब बन गया है। ऐसा इसलिए भी कि उत्तराखंड में हिंदुओं के प्रसिद्ध बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री तथा गंगोत्री जैसे धार्मिक तीर्थ अथवा धाम स्थित हैं। सिखों का प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब भी उत्तराखंड में ही स्थित है। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी भी उत्तराखंड में ही होने के चलते लोगों का उत्तराखंड की ओर रूख करना लाजिमी भी है। अब तो आदि कैलाश भी पर्यटकों और तीर्थाटन प्रेमियों की आमद नया केंद्र उभर कर सामने आ गया है। यही नहीं पर्वतारोहण अथवा पथारोहण का नया रूप भी उत्तराखंड में सामने आ गया है। भारत के उत्तर-पूर्व के राज्यों का भी पर्यटक दीदार करते रहते थे। पिछले कई वर्षों से नार्थ-ईस्ट के राज्य भी आंतकवाद से ग्रस्त हो चले हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि पर्यटकों ने अब हिमाचल तथा उत्तराखंड को अपना पसंदीदा पर्यटन केंद्र बना दिया है। उत्तराखंड तो पर्यटन तथा तीर्थाटन का हब बन गया है। इसके चलते ही अब पूरे देश के सनातनी और पर्यटक उत्तराखंड की वादियों का दीदार करने लगे हैं।

पिछले कुछ सालों से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की उत्तराखंड में भारी आमद के चलते पर्यटन आधारित कारोबारी गतिविधियां भी उत्तराखंड में परवान चढ़ने लगी है। रोजगार का प्रमुख संसाधन मानते हुए अब यहां के लोगों ने आलीशान होटल, लाॅज, होम-स्टे आदि खड़े कर सुविधाओं को बेहतर बना दिया है। इसके चलते अब तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने उत्तराखंड की राह पकड़ ली है। कहा जा सकता है कि उत्तराखंड के लोगों के लिए तीर्थाटन और पर्यटन आजीविका का प्रमुख संसाधन बन गया है। इसमें हजारों लोगों की आजीविका को बल मिल रहा है। यही वजह है कि मौजूदा दौर में भारत के कोने कांतर से तीर्थयात्री और पर्यटक उत्तराखंड की ओर रूख करते चले आ रहे हैं। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए यह शुभ संकेत के रूप में माना जा रहा है। बदरीनाथ धाम में तो हर राज्य के तीर्थयात्री मौजूद रह कर इस बात का एहसास करा रहे है कि मानो समूचा भारत यहां की फिजाओं में रच बस गया हो। अब तो पर्यटन तथा तीर्थाटन को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है। इस पर ही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का भविष्य टिक गया है।

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