- कथित वीआईपी कोण पर फिर उठे सवाल, पहचान और भूमिका स्पष्ट करने की मांग
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की चौथी बरसी पर शुक्रवार को पहाड़ स्वाभिमान सेना के आह्वान पर सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के लोग देहरादून स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कार्यालय पहुंचे। कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शनकारियों ने अंकिता को श्रद्धांजलि दी और मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कथित वीआईपी कोण की जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने, कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका स्पष्ट करने तथा जांच की प्रगति जनता के सामने रखने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तीन मुख्य दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन इससे मामले से जुड़े सभी सवाल खत्म नहीं हुए हैं। चार साल बाद भी कथित वीआईपी कोण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना था कि सीबीआई को यह साफ करना चाहिए कि इस कोण की जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है।
पहाड़ स्वाभिमान सेना के अध्यक्ष पंकज उनियाल ने कहा कि अंकिता को न्याय का अर्थ सिर्फ दोषियों को सजा मिलना नहीं है। मामले से जुड़े हर अनुत्तरित सवाल का तथ्यात्मक जवाब सामने आना भी जरूरी है। उन्होंने सीबीआई जांच को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता के प्रमाण सामने आते हैं तो उसके प्रभाव या पहुंच की परवाह किए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अधिवक्ता संदीप चमोली ने कहा कि कथित वीआईपी कोण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसलिए जांच एजेंसी को इसकी पहचान और भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि जांच में कोई प्रमाण नहीं मिलता है तो वह तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच और अंकिता के परिवार की ओर से उठाए गए सवालों को जांच का हिस्सा बनाने की मांग की।
उत्तराखंड क्रांति दल के नेता लूशुन टोडरिया ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी केंद्रीय जांच एजेंसी से जनता निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की अपेक्षा करती है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े हर व्यक्ति, परिस्थिति और साक्ष्य की जांच होनी चाहिए, चाहे संबंधित व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच की प्रगति की तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक करने, कथित वीआईपी कोण की जांच को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने और साक्ष्यों के संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की मांग की। उनका कहना था कि यदि किसी के खिलाफ प्रमाण हैं तो कार्रवाई हो और यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर स्थिति साफ करे।
प्रदर्शन में राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, महिला अध्यक्ष सुलोचना इष्टवाल, अधिवक्ता सेवा मंच के अध्यक्ष संदीप चमोली, संग्राम सिंह पुंडीर, नवनीत कुकरेती, हरेंद्र सिंह बेदी, कीर्तिवर्धन बिष्ट, प्रदीप फरस्वान, हिमांशु शर्मा, उत्तराखंड क्रांति दल की मीनाक्षी घिल्डियाल व दीप्ति दूधपूरी, राष्ट्रीय बजरंग दल अध्यक्ष सनी गुप्ता, पूर्व रायपुर विधानसभा अध्यक्ष अनिल डोभाल, ललित श्रीवास्तव, अंकित सजवान, राकेश नेगी, कपिल डोभाल, आशीष कुकरेती और आकांक्षा नेगी समेत कई लोग शामिल रहे।
