गोपेश्वर (चमोली)। मां नंदा की कैलाश विदाई के बीच चमोली जिले के उच्च हिमालय से प्रकृति प्रेमियों के लिए सुकून देने वाली खबर सामने आई है। जिले के ऊंचाई वाले बुग्यालों और पहाड़ियों में इस बार दुर्लभ हिमालयी पुष्प फेन कमल जिसे संजीवनी भी कहा जाता है, की भरमार देखने को मिल रही है। लंबे समय बाद इतनी बड़ी संख्या में फेन कमल के खिलने को पर्यावरण की सेहत के लिहाज से शुभ संकेत माना जा रहा है। इससे प्रकृति प्रेमियों के साथ वन विभाग के अधिकारियों के चेहरे भी खिल उठे हैं।
चेनाप फूलों की घाटी की ट्रैकिंग से लौटे प्रख्यात पर्यावरणविद् चंदन नयाल ने बताया कि इस बार चेनाप फूलों की घाटी में फेन कमल बड़ी संख्या में खिला है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों बाद इतनी अधिक संख्या में इस दुर्लभ पुष्प का दिखाई देना हिमालयी पर्यावरण के लिए सुखद संकेत है।
चमोली का उच्च हिमालय अपनी जैव विविधता के लिए दुनियाभर में अलग पहचान रखता है। फूलों की घाटी, रूपकुंड, सप्तकुंड, नंदीकुंड, हेमकुंड, द्रोणागिरी और चेनाप फूलों की घाटी समेत कई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दुर्लभ और औषधीय गुणों वाले पुष्प एवं वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें ब्रह्म कमल और फेन कमल प्रमुख हैं।
ऊंचाई पर खिलता है फेन कमल
फेन कमल हिमालय में करीब 4500 से 6000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है। यह सामान्यतः जुलाई मध्य से अक्टूबर मध्य तक खिलता है। खास बात यह है कि यह उन ऊंची पहाड़ियों में भी दिखाई देता है, जहां चट्टानी क्षेत्र अधिक होते हैं। सफेद रंग का यह पुष्प दूर से देखने पर पत्तियों के बीच जमे साबुन के झाग जैसा दिखाई देता है। यही विशिष्ट बनावट इसे दूसरे हिमालयी पुष्पों से अलग पहचान देती है। ब्रह्म कमल की तरह इसमें विशेष सुगंध नहीं होती, लेकिन औषधीय महत्व के कारण इसे बेहद महत्वपूर्ण हिमालयी वनस्पतियों में गिना जाता है।
औषधीय गुणों के कारण संजीवनी से जोड़ा जाता है
फेन कमल को लेकर हिमालयी परंपरा और आयुर्वेद में भी विशेष मान्यता रही है। लोकमान्यता के अनुसार इसे भगवान शिव के अघोरी और औघड़ स्वरूप की पूजा से जोड़ा जाता है। इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद परंपरा में इसे संजीवनी बूटी से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यता में राम-रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान के द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाने की कथा प्रसिद्ध है। मान्यता है कि हनुमान संजीवनी वाली पूरी पर्वत चोटी ही उठा ले गए थे और सुषेण वैद्य ने उसी औषधि से लक्ष्मण का उपचार किया था।
औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण की उम्मीद
फेन कमल का इस वर्ष बड़ी संख्या में खिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्र में औषधीय वनस्पतियों के अनियंत्रित दोहन की चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में उच्च हिमालय में दुर्लभ पुष्पों की अच्छी मौजूदगी उम्मीद जगाती है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में कई महत्वपूर्ण प्रजातियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक किसी एक प्रजाति के अधिक खिलने को पूरे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन और लंबे समय के आंकड़ों की जरूरत होती है। फिर भी चेनाप जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में फेन कमल की इतनी अधिक मौजूदगी प्रकृति प्रेमियों के लिए निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाली खबर है।
फिलहाल मां नंदा की कैलाश विदाई के बीच हिमालय की चोटियों पर खिला सफेद फेन कमल प्रकृति के उस अनमोल रूप की याद दिला रहा है, जिसे बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी भी है।
