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बदरीनाथ से हाथी पर्वत तक दो दुर्घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

2017 में बदरीनाथ हेलीपैड पर हादसे में इंजीनियर की गई थी जान

अब ज्योतिर्मठ घाटी में छह लोगों को लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश

खराब मौसम के बीच हवाई सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय की दुर्गम घाटियों में हेलीकॉप्टर उड़ान एक बार फिर हादसे का कारण बन गई। चमोली जिले में करीब आठ साल के अंतराल में बदरीनाथ और ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुई दो हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा के लिए उड़ान भरने वाला ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ के हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के वक्त हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे।

इससे पहले 10 जून 2017 को बदरीनाथ धाम के हेलीपैड पर क्रेस्टल एविएशन का हेलीकॉप्टर उड़ान भरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अगस्ता-119 हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से हरिद्वार के लिए रवाना होने वाला था। उड़ान भरते समय संतुलन बिगड़ने से हेलीकॉप्टर नीचे गिर गया था। इस हादसे में चालक दल के इंजीनियर विक्रम लांबा की रोटर ब्लेड की चपेट में आने से मौत हो गई थी, जबकि दोनों पायलट घायल हुए थे। हेलीकॉप्टर में सवार पांचों यात्री सुरक्षित बच गए थे।

आठ साल बाद शुक्रवार को हुई दुर्घटना ने एक बार फिर बदरीनाथ घाटी में हवाई उड़ानों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। इस बार हादसा उड़ान भरने के बाद ज्योतिर्मठ घाटी के हाथी पर्वत क्षेत्र में हुआ। ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर दोपहर करीब 1रू14 बजे बदरीनाथ से रवाना हुआ था। कुछ समय बाद उसका संपर्क टूट गया और ट्रैकिंग सिस्टम ने भी काम करना बंद कर दिया। बाद में हाथी पर्वत क्षेत्र में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना सामने आई।

घटना के समय बदरीनाथ और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी तथा निचले इलाकों में बारिश हो रही थी। खराब मौसम, कम दृश्यता और पहाड़ी घाटियों की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच हुई इस दुर्घटना ने हवाई संचालन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना का संज्ञान लेते हुए सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए। यूकाडा के दो हेलीकॉप्टरों से हवाई रेकी कराई गई। एम्स ऋषिकेश और बेस अस्पताल श्रीनगर को भी अलर्ट किया गया।

दोनों दुर्घटनाओं के बीच आठ साल का अंतर जरूर है, लेकिन सवाल वही है कि हिमालयी क्षेत्र में संचालित हेली सेवाओं की सुरक्षा कितनी पुख्ता है। चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाओं का बढ़ता इस्तेमाल और मौसम की अनिश्चितता देखते हुए अब उड़ान सुरक्षा, मौसम आकलन और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो गई है।

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By admin

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