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गोपेश्वर (चमोली)। उच्च हिमालय के बीच बसे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ धाम में शनिवार को आस्था और भावुकता का अनूठा संगम नजर आया। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और भगवान शिव के जयकारों के बीच मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होते ही श्रद्धालुओं की आवाजाही से गुलजार रहने वाले धाम में अगले छह माह के लिए विराम लग गया। अब शीतकाल में श्रद्धालु गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर सकेंगे।

कपाट बंदी के अवसर पर धाम में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। अंतिम पूजा के साथ भगवान रुद्रनाथ की आराधना की गई और विधि-विधान से कपाट बंद किए गए। हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम और सर्दियों में बर्फबारी की चुनौती के बीच कपाट बंद होने का यह क्षण यात्रा सीजन के समापन का प्रतीक बना। शिवभक्तों के लिए यह विदाई अगले वर्ष फिर बाबा के धाम पहुंचने की प्रतीक्षा छोड़ गई।

डोली के साथ शीतकालीन प्रवास पर निकलेंगे बाबा

कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर के लिए रवाना होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रूद्रनाथ की उत्सव डोली 18 अक्टूबर देवालधार के ज्वाला देवी मंदिर में प्रवास करेगी। 19 अक्टूबर को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां शीतकाल के दौरान भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना होगी।

छह माह तक गोपीनाथ मंदिर में होंगे दर्शन

पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में पूजित रुद्रनाथ धाम समुद्र तल से करीब 3,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। सर्दियों में दुर्गम पैदल मार्ग और प्रतिकूल मौसम के कारण धाम तक पहुंचना कठिन हो जाता है। कपाट बंद होने के साथ ही अब रुद्रनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंचना होगा।

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