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माणा में माता मूर्ति उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाबपांच हजार से अधिक श्रद्धालु बने साक्षी

गोपेश्वर (चमोली)। भू-बैकुंठ धाम बदरीनाथ  में बुधवार को वामन द्वादशी पर माता मूर्ति उत्सव आस्था और उल्लास के बीच संपन्न हुआ। भगवान बदरीविशाल की पवित्र गद्दी और उनके प्रतिनिधि भगवान उद्धव जी की डोली गाजे-बाजे के साथ माता मूर्ति मंदिर पहुंची। यहां सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार माता मूर्ति और भगवान नारायण के पवित्र संबंध का स्मरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठान किए गए। इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए पांच हजार से अधिक श्रद्धालु माणा पहुंचे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता मूर्ति भगवान नर-नारायण की माता हैं। भगवान उद्धव जी को भगवान बदरीविशाल का प्रतिनिधि माना जाता है। इसी मान्यता के तहत हर वर्ष वामन द्वादशी पर उद्धव जी की डोली बदरीनाथ धाम से माता मूर्ति मंदिर पहुंचती है। पूजा-अर्चना के बाद भगवान की कुशलक्षेम माता मूर्ति तक पहुंचाने की परंपरा निभाई जाती है।

मंगलवार शाम माणा गांव से श्री घंटाकर्ण घन्याल महाराज बदरीनाथ मंदिर पहुंचे और भगवान बदरीविशाल को माता मूर्ति उत्सव का न्योता दिया। बुधवार सुबह प्रातःकालीन भोग के बाद करीब 10 बजे भगवान बदरीविशाल की गद्दी और उद्धव जी की डोली सिंहद्वार से माणा के लिए रवाना हुई। आईटीबीपी कैंप से आगे माणा के ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में देव डोली का स्वागत किया। महिलाओं और पुरुषों ने पवित्र जौ की हरियाली भेंट की।

माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर हरियाली अर्पित की गई और बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। मंदिर परिसर में रावल, धर्माधिकारी, पुजारियों और स्थानीय हक-हकूकधारियों ने पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद उद्धव जी की डोली को माता मूर्ति के समक्ष ले जाया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान की कुशलक्षेम माता मूर्ति को बताई गई और अगले वामन द्वादशी पर फिर आने का संकल्प दोहराया गया। इस दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की जयकारों से गूंजता रहा।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने माता मूर्ति मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि माता मूर्ति मेला बदरीनाथ धाम की प्राचीन धार्मिक विरासत और संस्कृति का प्रतीक है। इससे पहले उन्होंने बदरीनाथ मंदिर में दर्शन कर यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। माता मूर्ति मंदिर में रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वाणी विलास डिमरी, अमित बंदोलिया और पुजारी हनुमान प्रसाद डिमरी ने पूजा-अर्चना और अभिषेक कराया। आईटीबीपी, सेना और दानी-दाताओं की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे भी लगाए गए।

मेले में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, सलाहकार माधव सेमवाल, पूर्व उपाध्यक्ष किशोर पंवार, सदस्य विनीत पोस्ती, मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, ग्राम प्रधान माणा पीतांबर मोल्फा सहित तीर्थ पुरोहित, श्रद्धालु, पुलिस, एसडीआरएफ, होमगार्ड और मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार बुधवार शाम कुबेर जी के पश्वा द्वारा मंदिर में स्नान की धार्मिक परंपरा भी निभाई गई।

तीन घंटे बंद रहे बदरीनाथ मंदिर के कपाट

माता मूर्ति उत्सव के चलते सुबह 10 बजे से बदरीनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। भोग-प्रसाद के बाद करीब तीन बजे उद्धव जी की डोली और भगवान बदरीविशाल की गद्दी वापस बदरीनाथ मंदिर पहुंची। इसके बाद शाम 3रू15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।

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By admin

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