खबर को सुनें

गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं और नाबालिगों के साथ हुई हत्या, दुष्कर्म और उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर चमोली जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर है तो अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की घटनाएं लगातार क्यों सामने आ रही हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष डिमरी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड, हेमा नेगी और पिंकी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चंपावत में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप वाले मामले का भी जिक्र किया। इस मामले में पुलिस जांच के बाद अलग निष्कर्ष सामने आया और बाद में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई। डिमरी ने कहा कि ऐसे मामलों में शुरुआती स्तर से लेकर अंतिम जांच और न्यायिक प्रक्रिया तक पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा मिलना जरूरी है। उन्होंने मंगलौर में सामूहिक दुष्कर्म, द्वाराहाट में दलित नाबालिग से दुराचार और श्रीनगर में युवती से दुराचार की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि महिला अपराध किसी एक जिले या क्षेत्र की समस्या नहीं रह गए हैं। उनके अनुसार, राजधानी से लेकर पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक ऐसी घटनाएं सामने आना सरकार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।

जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर दावे तो किए जाते हैं, लेकिन घटना होने से पहले अपराध रोकने की व्यवस्था कहां है, इस सवाल का जवाब सरकार को देना चाहिए। डिमरी ने कहा कि केवल घटना के बाद मुकदमा दर्ज करना और गिरफ्तारी करना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को भयमुक्त वातावरण देना और अपराध होने से पहले प्रभावी रोकथाम करना सरकार की जिम्मेदारी है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद भी यदि महिलाओं के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए क्या बदला। उन्होंने पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई और पीड़ितों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।

डिमरी ने सरकार से पूछा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं की जवाबदेही आखिर किसकी है। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा केवल राजनीतिक भाषणों का विषय नहीं हो सकती। इसकी असली परीक्षा तब होती है, जब किसी महिला या बेटी को खतरा महसूस हो और प्रशासन समय रहते उसकी मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के हर मामले में निष्पक्ष जांच, समयबद्ध कार्रवाई और दोषियों को कानून के अनुसार सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवारों को न्याय की प्रक्रिया में अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

डिमरी ने कहा कि कांग्रेस महिला सुरक्षा के मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और सरकार से यह सवाल पूछती रहेगी कि उत्तराखंड की बेटियों को सुरक्षित माहौल देने में आखिर चूक कहां हो रही है और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।

 

हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें

By admin

Leave a Reply

error: Content is protected !!