गोपेश्वर (चमोली)। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट सोमवार को वैदिक रीति-रिवाजों, मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही हिमालय की दिव्य वादियां हर-हर महादेव और जय बाबा रुद्रनाथ के जयघोष से गूंजायमान हुआ।
विश्व प्रसिद्ध पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में विशेष स्थान रखने वाले रुद्रनाथ धाम में भगवान शिव के ‘एकानन स्वरूप’ यानी मुख रूप की पूजा की जाती है। हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह पवित्र धाम अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सौंदर्य और रहस्यमयी दिव्यता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
कपाटोद्घाटन के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद रहे। रूद्रनाथ के मुख्य पुजारी पं. हरीश भट्ट ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। अब आगामी छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना इसी धाम में की जाएगी।
रुद्रनाथ यात्रा अपने कठिन लेकिन रोमांचकारी पैदल मार्ग के लिए भी जानी जाती है। दुर्गम पर्वतीय रास्तों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं को अध्यात्म, प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम का अनुभव कराती है। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की पवित्र रुद्रनाथ यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है। यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए चमोली पुलिस द्वारा यात्रा मार्ग एवं प्रमुख पड़ावों पर सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए गए हैं।

