गोपेश्वर (चमोली)। हेमकुंड साहिब-लोकपाल यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके तहत सेना के जवान और सेवादार बर्फ हटाने में जुटे हुए हैं। इसके तहत अब आवागमन को सुचारू करने के लिए डेढ किमी का फासला ही रह गया है।
दरअसल सिखों के प्रमुख धाम हेमकुंड साहिब तथा हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आगामी 23 मई को खुलने जा रहे हैं। इसके चलते हेमकुंड साहिब मार्ग से बर्फ हटाने को सेना के जवानों और सेवादारों ने कमान संभाल रखी है। हालांकि पिछले दो दिनों से मौसम साथ नहीं दे रहा। इसके बाद भी सेना के जवान बर्फ हटाने की मुहिम में डटे हुए हैं। घांघरिया से हेमकुंड साहिब का मार्ग बर्फवारी तथा ग्लेशियर के चलते आवाजाही को सुचारू करने के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। भारतीय सेना के जवान और गुरूद्वारा के सेवादार कठिन हिमालयी परिस्थितियों के बीच पैदल मार्ग से बर्फ हटाने में जुटे हुए है। यात्रा के मुख्य पडाव घांघरियां में लगातार बर्फ गिर रही है। अटलाकोटी ग्लेशियर प्वांइट पर तो ग्लेशियर को हटाना किसी चुनौती से कम नहीं था। सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9 माउंटेन ब्रिगेड) की टीम सेवादारों के साथ ग्लेशियर को हटा कर आगे बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि इस काम में जवानों और सेवादारों को सफलता मिल गई है। अब हेमकुंड साहिब के करीब डेढ किमी की दूरी पर टीम पहुंच गई है। इस दौरान जवान इस मार्ग पर जमीं मोटी बर्फ को काटते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा के मुख्य पडाव गोविंदघाट में मुख्य प्रवेश द्वार को भी भारतीय सेना के जवानों द्वारा रंग रोगन किया जा रहा है। यह काम भारतीय सेना के वाहन वन टन गाडी की सहायता से किया जा रहा है। सेना के अनुसार मुख्य गेट को उनके जवान मदन सिंह की स्मृति में बनाया गया है।
बताते चलें कि 23 मई को हेमकुंड साहिब तथा लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलने जा रहे हैं। इसके तहत पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश से रवाना होगा। भारतीय सेना पिछले कई दसकों से हर साल इस दुर्गम क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा देते हुए यात्रा मार्ग को सुगम बनाती रही है। गुरूद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भारतीय सेना और सेवादारों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से यात्रा मार्ग खुलने में अब थोडा ही वक्त रह गया है। उच्च हिमालय में करीब 15200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह सात बर्फ से ढकी पर्वत चोटिंयों और पवित्र हेमकुंड झील से घिरा है। इसी लिए इसे सप्तश्रृंग भी कहा जाता है। उन्होंने सभी लोगों से आगामी 23 मई को खुलने जा रहे कपाटोद्घान में प्रतिभाग करने की अपील की है।

