गोपेश्वर (चमोली)। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पत्रकारों से बातचीत में नगर में चल रहे स्थिरीकरण कार्यों और आपदा प्रभावितों के पुनर्वास को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022-23 की आपदा के बाद सरकार की ओर से किए गए वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
समिति के संयोजक अतुल सती ने कहा कि राज्य सरकार ने आंदोलन के बाद पुनर्वास और स्थिरीकरण की मांगों को स्वीकार किया था, जबकि केंद्र सरकार द्वारा 1640 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज भी स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद कार्यों में देरी चिंता का विषय है। कहा कि अधिकांश समय डीपीआर तैयार करने में बीत गया, जबकि जल निकासी और सीवेज व्यवस्था की डीपीआर अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में 600 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रगति पर हैं, लेकिन उनके चयन का आधार स्पष्ट नहीं है। विष्णुप्रयाग, नरसिंह मंदिर रोड, सुनील और मारवाड़ी क्षेत्रों में कार्य चल रहे हैं, जबकि सिंहद्वार, मनोहरबाग और रविग्राम जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता नहीं दी गई है। वैज्ञानिकों के हालिया अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि यदि 80 मीटर नीचे ठोस चट्टान मौजूद है, तो केवल 10-12 मीटर तक रॉक बोल्टिंग करना कितना सुरक्षित होगा, यह एक बड़ा सवाल है। नगर के अलकनंदा नदी की ओर खिसकने की बढ़ती गति पर भी चिंता जताई गई। पुनर्वास के मुद्दे पर समिति ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद मुआवजा, भूमि मूल्य निर्धारण और पुनर्वास स्थल चयन जैसी प्रक्रियाएं अभी अधूरी हैं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
समिति ने सरकार से मांग की है कि नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययनों को आधार बनाकर स्थिरीकरण कार्य किए जाएं, सभी डीपीआर सार्वजनिक की जाएं, संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता से कार्य शुरू हो तथा पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। प्रभावितों को प्रीफैब्रिकेटेड मकानों के निर्माण की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस दौरान समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार, प्रवक्ता कमल रतूड़ी, दीपक टम्टा, विनोद लाल शाह, दीपचंद्र कन्याल आदि मौजूद रहे।

