गोपेश्वर (चमोली)। श्री बदरीनाथ के कपाटोद्घाटन का काउंटडाउन शुरू होते ही बदरीनाथपुरी सज धजने लगी है। इसके चलते अब बदरीनाथपुरी के समीपवर्ती गांवों के लोग भी अपने मूल गांव पहुंचने लगे हैं। दरअसल आगामी 23 अप्रैल को भगवान बदरीविशाल के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनों को खुलने जा रहे है। इसके चलते बदरीनाथ धाम में होटल, लाॅज, धर्मशालाएं सुसज्जित होने लगी है। तीर्थाटन और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग भी सामान जुटा कर बदरीनाथपुरी में कारोबारी गतिविधियों को व्यवस्थित करने लगे है। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी भी व्यवस्थाओं को चाक चैबंद करने में लगे हैं। नगर पंचायत बदरीनाथ की टीम भी साफ सफाई से लेकर अन्य बुनियादी सुविधाओं की बहाली में जुटी हुई है। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती का कहना है कि श्रद्धालुओं के भव्य और दिव्य दर्शन के लिए जोरदार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं के साथ अतिथि देवो भवः की परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।
जल संस्थान तथा बिजली विभाग की टीमें भी सक्रियता से काम कर पेयजल और बिजली बहाली की दिशा में काम कर रहे हैं। बदरीनाथपुरी से सटे माणा, इंद्रधारा, गजकोटी, पथ्या, धनतोली तथा हनुमान चट्टी के जनजाति परिवार के लोग भी अपने मूल गांव को पहुंचने लगे हैं। कई जनजाति परिवार अपने मूल गांवों में तैयारियों को व्यवस्थित करने में जुटे हुए हैं। इंद्रधारा के लक्ष्मण सिंह महिपाल के अनुसार तमाम ग्रामीण शीतकालीन प्रवास स्थलों से अपने मूल गांवों में मकानों की साफ सफाई और व्यवस्थाओं को चाक चैबंद करने लगे है। अभी कई परिवार आने बाकी है। पांडुकेश्वर तथा लामबगड़ के लोग भी बामणीगांव के साथ बदरीनाथ धाम में व्यवस्थाओं की बहाली पर जोर दे रहे है।
बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर भी होटल कारोबारी होटलों को सुसज्जित करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। मौजूदा दौर में ईरान तथा इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के बीच रसोई गैस के संकट ने पर्यटन और तीर्थाटन कारोबारियों की चिंता को बढ़ा दिया है। इसके चलते सरकार को इस तरह के कारोबारियों के लिए रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता पर जोर देना होगा। ऐसा नहीं किया गया तो कारोबारियों के सम्मुख संकट खड़ा हो सकता है। वैसे भी पिछले साल पहलगाम की आंतकी घटना और धराली, थराली, नंदानगर आदि में प्राकृतिक आपदाओं के चलते उत्तराखंड की चारधाम यात्रा ठहर सी गई थी। इसके चलते पर्यटन अथवा तीर्थाटन कारोबारियों को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार की यात्रा को लेकर लोगों में उत्साह तो बना है किंतु रसोई गैस की चिंता भी लोगों को सता रही है। इसके चलते अब सरकार को चारधाम यात्रा मार्गों से लेकर पड़ावों और धामों में रसोई गैस का पर्याप्त इंतजाम करना होगा। इस पर ही उत्तराखंड की पर्यटन आधारित आर्थिकी का भविष्य निर्भर करेगा।

