26 साल बाद भी राज्य आंदोलन के सपने अधूरे
बेरोजगारी-पलायन और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल
देहरादून। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे पर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने घेराव कर केंद्र और राज्य सरकार से मूल निवास, सशक्त भू-कानून और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने समेत राज्य आंदोलन से जुड़े सवालों पर जवाब मांगा।
उक्रांद के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय प्रकाश उपाध्याय ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी उत्तराखंड बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। राज्य आंदोलनकारियों ने जिन सपनों के साथ अलग राज्य की लड़ाई लड़ी थी, वे आज भी अधूरे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदेश में अब तक मजबूत मूल निवास और भू-कानून लागू क्यों नहीं हो पाए और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने पर सरकार फैसला क्यों नहीं ले रही है।
केंद्रीय महामंत्री राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रदेश की जमीन, रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने मूल निवास, सशक्त भू-कानून के साथ महिला सुरक्षा, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय, युवाओं को रोजगार, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और आपदा प्रभावितों के स्थायी पुनर्वास की मांग उठाई।
महानगर अध्यक्ष प्रबीन रमोला ने कहा कि राष्ट्रीय दलों ने 26 वर्षों में प्रदेश की जनता को केवल चुनावी वादे दिए हैं। राजधानी देहरादून भी अनियोजित विकास, बेरोजगारी, महंगाई, प्रदूषण और पेयजल संकट से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति और उत्तराखंडियत की रक्षा के लिए उक्रांद का संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान उक्रांद नेताओं ने सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, मूल निवास और सशक्त भू-कानून लागू करने तथा जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय जनता के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। दल ने चेतावनी दी कि प्रदेश के हितों और जनता के अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।
प्रदर्शन में केंद्रीय उपाध्यक्ष बहादुर सिंह रावत, प्रमिला रावत, केंद्रीय महामंत्री राम चौहान, राजेश्वरी रावत, सौम्य चौधरी, रघुवीर राणा, कैलाश देवरानी, गणेश कला, प्रकाश भट्ट, जितेंद्र पवार, अनूप बिष्ट, भोला चमोली, गिरीश कोठारी, लुसन टोडरिया, संदीप रावत, जितेंद्र सिंह, राजेंद्र रावत, अजय सिंह, संतोष नौटियाल, अनिल राणा समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
