- रीप से मिली 35 हजार की मदद, डेयरी व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
कर्णप्रयाग (चमोली)। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) से मिली आर्थिक मदद और मेहनत के दम पर ग्राम कनौठ की लक्ष्मी देवी ने डेयरी व्यवसाय को अपनी आय का मजबूत जरिया बना लिया है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पशुपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया और अब प्रतिदिन आठ से 10 लीटर दूध बेचकर हर माह करीब 10 से 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
लक्ष्मी देवी अनुसूया मां ग्राम संगठन और नंदा क्लस्टर नौटी के अंतर्गत संचालित जय संतोषी मां स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए डेयरी व्यवसाय शुरू किया।
ग्रामोत्थान परियोजना के तहत अल्ट्रा पुअर पैकेज के माध्यम से उन्हें 35 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। लक्ष्मी देवी ने इस राशि का उपयोग डेयरी गतिविधि को बढ़ाने में किया। धीरे-धीरे उन्होंने पशुपालन को नियमित आय के स्रोत के रूप में विकसित कर लिया।
वर्तमान में वह स्थानीय बाजार में प्रतिदिन करीब आठ से 10 लीटर दूध बेच रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आय हो रही है। डेयरी से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और लक्ष्मी देवी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
लक्ष्मी देवी के अनुसार स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और रीप के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें अपनी आजीविका को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। अब वह आत्मविश्वास के साथ डेयरी व्यवसाय कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी योगदान दे रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा बन रही है।
