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संपादक कि कमल। उत्तराखंड जो मैदान और पहाड़ों का खूबसूरत राज्य जिस पर गढ़वाली,कुमाऊनी व जौनसारी बोली की मीठी चासनी इसकी खूबसूरती को चांद चांद लगा देती है जहां चार धाम के साथ-साथ पंच बद्री,पंच केदार और पंच प्रयाग है जिसे पूरे विश्व में देवभूमि के नाम से जाना जाता है जहां के लोगों की आस्था ईश्वर ही नहीं अपितु उत्तराखंड के जमीन जंगल और जल भी हैं यहां भूमि के भूम्याल से लेकर जल के मसाण तक पूजे जाते हैं जिनके वनों में वन देवियों का वास है हर पानी की बूंद में गंगा विराजमान है जहां जन्म पाकर इंसान देव तुल्य के समान है कुछ ऐसी उत्तराखंड राज्य की पहचान है।

9 नवंबर सन 2000 के बाद उत्तराखंड राज्य स्थापित हुआ तो उसके बाद से इसके नाम के पीछे इसकी पहचान के पीछे देवभूमि के साथ-साथ घोटाले बाजों का नाम भी आने लगा राज्य की शुरुआत से ही 56 घोटाले जैसी खबरें आती जा रही हैं और इस वर्ष से तो कुछ ज्यादा ही घोटाले सामने आ रहे हैं चाहे वह घोटाला युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता हुआ परीक्षाओं का हो या वह घोटाला विधान सभा सचिवालय के कार्यों का हो कुछ समय से उत्तराखंड राज्य  कि पहचान घोटाले बाज के नाम से हो रही है।

उत्तराखंड राज्य जो क्रांति और आंदोलन के दम पर बना है जिसको पाने के लिए यहां के लोगों ने अपना पानी से लेकर जवानी तक निछावर कर दी आज वही राज्य चुप्पी साधे बैठा है क्या आंदोलनकारियों ने इस समय के लिए उत्तराखंड राज्य मांगा था? क्या उत्तराखंड का क्रांतिकारी खून जम चुका है? कुछ ऐसे ही सवाल है जिसके घेरे में उत्तराखंड का भविष्य अंधकार में जा रहा है।

                                                           अनुराग पोखरियाल

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