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देहरादून: उत्तराखंड के प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। “दबी जुबां” न्यूज पोर्टल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीआरडी जवान अपनी मूलभूत सुविधाओं और रोजगार की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

प्रमुख मांगें: 365 दिन का रोजगार और नियमितीकरण

संगठन के प्रदेश संयोजक प्रमोद मंद्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनकी सबसे पहली और प्रमुख मांग साल के 365 दिन रोजगार सुनिश्चित करना है। वर्तमान में, कई जवानों को साल में केवल 6 महीने ही काम मिल पाता है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।

“पुलिस से कंधे से कंधा मिलाकर करते हैं काम”

मंदवाल ने भावुक होते हुए कहा कि चाहे कोविड काल हो, चारधाम यात्रा हो या 2013 की केदारनाथ आपदा, पीआरडी जवानों ने हमेशा पुलिस के साथ मिलकर विषम परिस्थितियों में काम किया है। उन्होंने बताया कि जहाँ पुलिस नहीं पहुँच पाती, वहाँ पीआरडी जवान तैनात रहता है, फिर भी सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है।

 

सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य गठन के 26 साल बाद भी उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती है। जवानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आगामी चुनावों में 7 लाख पीआरडी परिवार इसका जवाब देंगे।

 

चारधाम यात्रा और कुंभ पर असर?

आगामी चारधाम यात्रा का जिक्र करते हुए जवानों ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह से उन पर निर्भर रहता है। यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर राज्य की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

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