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गोपेश्वर (चमोली)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि जनजाति समाज देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा है। इसके चलते जनजाति समाज को पौराणिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए होम स्टे के जरिए आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

नीती माणा जनजाति कल्याण समिति के तत्वाधान में बिरही के बेडूबगड़ में आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम समारोह के अंतिम दिन बतौर मुख्य अतिथि सीएम धामी ने कहा कि जनजाति समाज ने हमेशा ही उत्तराखंड की सभ्यता को पहचान दिलाने का काम किया है। नीती, माणा, मुनस्यारी, धारचूला क्षेत्रों में रह रहे जनजाति लोग देश के प्रहरी के रूप में सीमाओं की रक्षा का काम भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने में उनका कोई सानी नहीं है। मौजूदा दौर में प्राथमिक संसाधनों को सहेजने की जरूरत है। इस दिशा में जनजाति समाज के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे है। आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि जनजाति समाज की भलाई के लिए उन्होंने अपने जीवन को समर्पित किए रखा। सरकार की कोशिश यही है कि जनजाति समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास योजनाओं को लाभ पहुंचे। इसके लिए डबल इंजन सरकार जोरदार प्रयासों में जुटी हुई है।

सीएम धामी ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसने सत्ता में रहते हुए जनजातियों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। जनजाति की भलाई के लिए कांग्रेस ने कभी कोई प्रयास नहीं किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजाति समाज के विकास का बीडा उठाया है। पीएम जनजातीय ग्राम अभियान इसी का हिस्सा है। एकलब्य शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। कालसी, खटीमा तथा मेहर में एकलव्य विद्यालय स्थापित किए गए हैं। नीती घाटी में इनर लाइन को अब नीती गांव तक बढा दिया गया है। जनजातीय शोध संस्थान की स्थापना कर एक करोड़ का कारपस फंड बनाया गया है।

नीती घाटी के डिम्मरसैण महादेव जिसे छोटा अमरनाथ कहा जाने लगा है के सौंदर्यीकरण के लिए 26 करोड़ की राशि आंवटित कर दी गई है। जनजाति समाज के उत्थान के लिए बजट को पहले से तीन गुना बढ़ा दिया गया है। सीमांत के अंतिम गांवों को अब प्रथम ग्राम की संज्ञा दे दी गई है। कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति ग्राम के तहत राज्य में 128 गांव चिह्नित कर दिए गए हैं। सीमांत गांव से पलायन को रोकने के लिए होम स्टे बनाए गए हैं। अकेले चमोली जिले में आठ सौ होम स्टे के जरिए लोगों की आजीविका को मजबूत किया जा रहा है।

इस दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बत्र्वाल, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, बरिष्ठ नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष हरक सिंह नेगी, पालिकाध्यक्ष संदीप रावत, कृष्णमणि थपलियाल, चंद्रकला तिवारी, गजेंद्र रावत, नंदन बिष्ट, महामंत्री अरूण मैठाणी व विनोद कनवासी, पूर्व मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, चिपको नेत्री गौरा देवी की सहेली बाली देवी, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार समेत तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व नीती-माणा जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश परमार, उपाध्यक्ष गुलाब सिंह बिष्ट, कोषाध्यक्ष रणजीत सिंह बुटोला, संयोजक मंडल के सदस्य धीरेंद्र गरोडिया, पुष्कर सिंह राणा आदि ने सीएम धामी का जोरदार स्वागत किया।

प्रमुख घोषणाएं

गोपेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनजाति समागम समारोह में कई तोहफे भी दिए।

-नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं अन्य भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण होगा।

-बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन का निर्माण।

-चिपको नेत्री गौरा देवी जी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण किया जाएगा।

-बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण होगा।

-बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्य किया जाएगा।

सीएम को पहनाया पारंपरिक दोखा

गोपेश्वर। भोटिया पड़ाव स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर जनजातीय महिलाओं ने अपनी समृद्ध परंपरा का प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पौराणिक पौणा नृत्य के साथ स्वागत किया। महिलाओं ने प्रेम और सम्मान के प्रतीक स्वरूप मुख्यमंत्री को भोज पत्र की माला एवं पारंपरिक दोखा पहनाकर उनका अभिनंदन किया।

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