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बदरीनाथ (चमोली)। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत बुधवार को श्री आदिकेदारेश्वर तथा आदिगुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए।

बुधवार को श्री बदरीनाथ धाम की पंच पूजाओ के अंतर्गत श्री आदिकेदारेश्वर जी तथा आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए। रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने भगवान आदिकेदारेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को पके चावल  अन्नकूट का भोग लगा कर ढ़क दिया गया  तथा  स्वयंभू शिवलिंग को  समाधि रूप दिया। इसके पश्चात पुजारी यमुना प्रसाद डंगवाल ने ठीक अपराह्न डेढ़ बजे आदि केदारेश्वर के कपाट बंद कर दिये। इसके तुरंत बाद रावल ने आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर में कपाट बंद होने से पहले पूजा संपादित की। दोनो मंदिरों के कपाट बंद होने के दौरान बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी आचार्य राधाकृष्ण थपलियाल, वेदपाठी रविन्द्र भट्ट ने पूजा अर्चना की। इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य भास्कर डिमरी, नायब रावल अमरनाथ नंबूदरी, पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चैहान, राजेंद्र सेमवाल, संतोष तिवारी, थाना अध्यक्ष केसी भट्ट, डा. हरीश गौड़, अजय सती, अनसुया नौटियाल, कुलदीप नेगी, राजदीप सनवाल,  सतीश मैखुरी  सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि गुरूवार  17ं नवंबर  खडग पुस्तक पूजन तथा वेद ऋचाओं का पाठ बंद हो जायेगा। 18 नवंबर को मां लक्ष्मी जी का पूजन होगा 19 नवंबर को शाम श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हो जायेंगे।

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