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गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र में तीन सड़कों को लेकर सियासी सिर फुटब्बल मचा है। इसके चलते सियासत में घमासान छिड़ गया है। दरअसल बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आली-जिलासू, स्यूण-डुमक तथा निजमुला-पाणा-ईराणी सड़कों को लेकर अब भाजपा तथा कांग्रेस के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है। इसके चलते आगामी विधानसभा चुनाव में इन सड़कों को लेकर सियासी रार छिड़ने के आसार बढ़ गए हैं। गौरतलब है कि दशोली ब्लाॅक के अधीन निजमुला-पाणा-ईराणी सड़क निर्माण लंबे अर्से से हो रहा है। इसके बावजूद पाणा तथा ईराणी जैसे दूरस्थ गांव के लोगों को यातायात सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब भी मोटर पुल का मामला आवाजाही में मुश्किलें पैदा कर रहा है। बीते कई वर्षों से मोटर पुल का निर्माण पूरा होने की राह ताक रहे ग्रामीणों की आंखे भी पथरा गई है। इसके बावजूद मोटर पुल के अभाव में दूरस्थ गांव की आवाजाही मुश्किलों में पड़ी हुई है। इससे इन गांवों के युवाओं की व्याह-शादी भी संकट में घिरती जा रही है। सड़क को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चल रहा है किंतु लोगों की मुश्किलें दूर होती नजर नहीं आ रही है।

पोखरी ब्लाॅक के अधीन आली-जिलासू मोटर मार्ग का मामला भी सियासत की भेंट चढ़ गया है। इस मार्ग का कुछ हिस्सा अभी कई सालों से बन नहीं पाया है। इसके चलते इस इलाके के लोगों को पोखरी होते हुए कर्णप्रयाग के रास्ते गोपेश्वर पहुंचना पड़ रहा है। इससे समय तथा धन की बर्वादी हो रही है। आली से झिलोटी के बीच मार्ग न बनने से आवाजाही सुचारू न होने लोगों की दिक्कते कम नहीं हो रही है। अब तो एक नया स्लाइड जोन उभर जाने से और मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। यदि यह मार्ग सुचारू हो जाता तो लोगों को पोखरी से आली-जिलासू होते हुए लंगासू पहुंचने में समय तथा धन की बर्वादी से भी निजात मिलती। अब इस सड़क को लेकर अब दोनों दल एक दूसरे को निशाने पर ले रहे हैं। कहा जा सकता है कि यहां भी सड़क को लेकर सियासी फुटब्बल चल रही है।

दशोली ब्लाॅक के स्यूण से जोशीमठ ब्लाॅक के डुमक गांव तक की सड़क भी अधर में लटकी पड़ी है। मौजूदा दौेर में डुमक गांव के लोगों को कुजौं गांव से 13 किमी पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। हेलंग से उर्गम होते हुए कलगोठ तक सड़क तो बन गई है किंतु इस सड़क से भी ग्रामीणों को काफी पैदल चलना पड़ रहा है। समय तथा अधिक दूरी के चलते लोगों को और भी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। डुमक के ग्रामीण कई बार चुनाव बहिष्कार भी कर गए हैं किंतु मामला अभी भी अधर में लटका पड़ा है। इस सड़क को लेकर भी दोनों दलों में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है।

बदरीनाथ विधानसभा की तीनों सड़कें अब सियासी रंग भी लेने लगी है। इसके चलते माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में तीनों सड़कों का मामला चुनावी मुद्दा भी बनेगा। इससे पूर्व इन सड़कों को लेकर किस तरह की कवायद होती है। इस पर ही ग्रामीणों का भविष्य निर्भर करेगा। फिलहाल तो तीनों सड़कें आरोप-प्रत्यारोपों की भेंट चढ़ी हैं।

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