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  • 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने की मांग उठाई

गोपेश्वर (चमोली)। राजकीय शिक्षक संघ जनपद कार्यकारिणी चमोली ने सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग के शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के विभागीय आदेश का विरोध किया है। संघ ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले नियुक्त एलटी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं की जानी चाहिए। इस संबंध में जनपद कार्यकारिणी ने प्रांतीय कार्यकारिणी को ज्ञापन भेजकर सरकार और विभाग से वार्ता करने की मांग की है।

संघ के अनुसार निदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड की ओर से 12 अगस्त को जारी पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के एक सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के आदेशों के क्रम में सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग के शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए टीईटी को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद एलटी शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

राजकीय शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद एनसीटीई ने वर्ष 2010 में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम अर्हताओं के साथ टीईटी की व्यवस्था शुरू की थी। इसके बाद वर्ष 2011 में कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य पात्रता के रूप में अधिसूचित किया गया।

संघ के अनुसार उत्तराखंड में वर्ष 2013 के शासनादेश और फरवरी 2014 में लागू उत्तराखंड अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली के बाद एलटी पदों पर नियुक्ति के लिए, कुछ विषयों को छोड़कर, टीईटी को अनिवार्य योग्यता में शामिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2014 से एलटी पदों पर नियुक्त अधिकांश शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण हैं।

जिलाध्यक्ष प्रकाश सिंह चैहान ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले एलटी पदों पर नियुक्त शिक्षक उस समय निर्धारित सभी शैक्षिक एवं प्रशिक्षण योग्यताएं पूरी करने के बाद नियुक्त हुए थे। ऐसे में बाद में लागू की गई पात्रता को उन पर भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का टीईटी संबंधी फैसला मुख्य रूप से आरटीई एक्ट 2009 और एनसीटीई की 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना के तहत कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों से संबंधित है। इसलिए वर्ष 2014 से पहले नियुक्त एलटी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाना चाहिए।

जनपद कार्यकारिणी ने प्रांतीय कार्यकारिणी से अपील कि है कि वर्ष 2014 से पहले नियुक्त एलटी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने के संबंध में सरकार और विभाग से वार्ता की जाए। शिक्षकों की विभिन्न स्तरों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को भी शीघ्र शुरू कराने की मांग की गई है। संघ ने स्पष्ट किया कि एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर वह अपना विरोध जारी रखेगा।

इस मौके पर जिला संरक्षक अनूप रावत, जिला मंत्री बीरेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष दिनेश कुनियाल, मीनाक्षी सती, शर्मिला डिमरी, संतोष बिष्ट, पार सिंह बिष्ट, बलवंत सिंह बिष्ट, अशोक कुमार, अतीश चंद्र खंडूड़ी एवं गौतम कल्पना समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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By admin

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