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उखीमठ (रुद्रप्रयाग)। द्वितीय केदार मदमहेश्वर मंदिर के कपाट पारंपरिक रीति रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत रूप से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।

कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया था। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि मदमहेश्वर यात्रा को लेकर समिति की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हक-हकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची तथा बुधवार सुबह वहां से प्रस्थान कर मदमहेश्वर धाम पहुंची। निर्धारित तिथि पर पूर्वाह्न 11.30 बजे भगवान मदमहेश्वर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कहा कि कपाट खुलने के दिन 1135 श्रद्धालु भगवान मदमहेश्वर के दर्शन के लिए धाम पहुंचे। कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया गया।

इस दौरान मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दिनेश कानोड़िया, डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार, गणेश सेमवाल, प्रकाश पंवार आदि मौजूद रहे।

 

 

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