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सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल 

जापान में हुए विस्फोट ने न केवल जापान को हिला दिया बल्कि पुरे विश्व में इस घटना को आज भी याद किया जाता है और सिख ली जाती है की इस तरह का विस्फोट न किया जाये ,जान मॉल की खती तो होती ही है साथ ही पर्यावरण पर भी बहुत दुष प्रभाव होता है। कल की मेरी दिल्ली से वापसी की यात्रा में मैं एक जापानी महिला से मिली डॉ .आया याजिमा जो की रीजनल एडवाइजर है डब्लू एच ओ साउथ ईस्ट एशिया (SEARO), नई दिल्ली की। मैं एक वास्तु शास्त्री होने के नाते ये जानती हु की व्यक्ति के स्वभाव पर उसके रहने की जगह का प्रभाव पड़ता है। हम खुद भी कई बार वास्तु को व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए इस्तेमाल में लाते है। जैसे की कूटनीतिज्ञ, जालसाज व्यक्ति के बैठने, खाने, सोने और कार्य करने की जगह बदल कर शांत, सौम्य और उदार बनाया जा सकता है। डॉ आया से मैंने जापान के लोगो की खास बात पूछी, तब उन्होंने बताया की जापानी लोग बहुत ही विनम्र होते है, संतोषी होते है और ज्यादा अपने देश के बाहर जाने की बात नहीं सोचते है इस कारण वश अधिकतर लोग पासपोर्ट भी नहीं बनवाते है और उनके देश के किसान भी समृद्ध है। मैंने हर शब्द को जापान की वास्तु से जोड़ा और ठीक वैसा ही पाया जापान की वास्तु उन्हें इन्ही गुणों से परिपक्व करेगी।

नागासाकी प्रान्त का अनियमित आकार है, जिसमें गोल शिमाबारा प्रायद्वीप है और, पश्चिम में आगे संकीर्ण त्रिकोणीय है। नागासाकी प्रायद्वीप के दक्षिण पूर्व में दो ताचिबाना खाड़ी। शिमाबारा प्रायद्वीप अरियाके सागर उत्तर और उत्तर-पूर्व में और शिमाबारा खाड़ी पूर्व और दक्षिण-पूर्व में । निशिसोनोकी निशिसोनोगी प्रायद्वीप नागासाकी शहर के उत्तर में प्रान्त के पश्चिमी तट के साथ लगभग लैंडलॉक्ड ओमुरा खाड़ी को घेरता है।

हिरोशिमा केन प्रान्त, दक्षिण-पश्चिमी होंशू। चुगोकू रेंज उत्तरी सीमा के साथ चलती है, और ओटा नदी के डेल्टा मैदानों को दक्षिण में । मैदान पर स्थित हिरोशिमा शहर, क्षेत्र की सबसे बड़ी राजधानी और केंद्र है। ऊपर दिए चित्र में आप देखेंगे की हिरोशिमा के बिच से नदी जा रही है।

शास्त्रीक ज्ञान से और गुरुवो के द्वारा दिए ज्ञान के आधार पर ये समझ आता है की जल का सम्बन्ध हर व्यक्ति से है और बड़ी घटनाओ से भी है। कई शहरो में जहाँ बम ब्लास्ट या परमाणु विस्फोट हुए उनका सम्बन्ध वास्तु के जल तत्व से मिलता है। नदी का होना और नदी के प्रवाह की दिशा यहाँ तक निर्धारित कर देते है की उस जगह पर रहने वाले लोग साधु संस्कार के होंगे या आतंवादी होंगे या डाकू लुटेरे होंगे या प्राकृतिक आपदाओ से घिरे होंगे। विष्णु जी के पूर्ण अवतार श्री कृष्णा ने भी जल का वास्तु शास्त्रीय उपयोग कर के भारत के इतिहास को बदला था। जब भगवान भी वास्तु शास्त्रीय ज्ञान को इस्तेमाल में लेते है तो हम तो मानव है हमे इसकी अवहेलना नहीं करनी चाहिए।

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