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गोपेश्वर (चमोली)।  देश की प्रतिष्ठित मानी जाने वाली श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) समेत तमाम अधिकारियों के टोटे से जूझ रही है। इसके चलते कहा जा सकता है कि बीकेटीसी अधिकारियों बिना भगवान भरोसे चल रही है। दरअसल बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी पद पर तैनात विजय प्रसाद थपलियाल को 17 मार्च को यकायक प्रतिनियुक्ति से अपने मूल विभाग मंडी समिति को चलता कर दिया गया। थपलियाल की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के 10 दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक मुख्य कार्याधिकारी के पद पर किसी भी तैनाती नहीं हो पाई है। इसके चलते वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर आहरण वितरण अधिकारी की तैनाती न होने के चलते आहरण वितरण से संबंधित मामले लटक गए हैं। हालांकि माना जा रहा था कि थपलियाल की विदाई के साथ ही इस महत्वपूर्ण पद पर तैनाती हो जाएगी किंतु अभी तक कोई नियुक्ति न होने से हालात असमजस के बने हुए है। इसके चलते मंदिर समिति के तमाम कार्य एक तरह से ठहर से गए हैं। वैसे भी बीकेटीसी में कार्याधिकारी, विशेष कार्याधिकारी तथा उप मुख्य कार्याधिकारी के पद भी खाली चल रहे हैं। इन पदों के खाली चलने के कारण मुख्य कार्याधिकारी की विदाई के पश्चात किसी को भी आहरण वितरण की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा पा रही है। इस तरह कहा जा सकता है कि बीकेटीसी मौजूदा दौर में अधिकारियों के टोटे से गुजर रही है। अब जबकि चारधाम यात्रा सिर पर है तो सीईओ समेत तमाम पदों के खाली पड़े रहने से तैयारियां भी परवान नहीं चढ़ पा रही है।

बीकेटीसी में अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्षों के साथ ही सदस्यों की मौजूदगी के बीच अधिकारियों का टोटा किसी के गले नहीं उतर पा रहा है। वैसे माना जा रहा था कि सीईओ की विदाई के साथ ही नई तैनाती के जरिए समिति का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहेगा। इस बार ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। अब जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम तथा 23 अप्रैल को बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने जा रहे हैं तो सीईओ की तैनाती के चलते ही यात्रा तैयारियां आगे बढ़ पाएंगी। इस पद पर नियुक्ति को लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं प्रारंभ हो गई हैं। कतिपय लोगों का मानना है कि सरकार इस पद पर किसी आईएएस तथा वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को तैनात कर सकती है। कतिपय लोग यह भी मान कर चल रहे हैं कि इस पद पर प्रतिनियुक्ति से ही किसी अधिकारी को तैनात किया जाएगा। अब चूंकि इस तरह की तैनाती शासन स्तर से ही होनी है तो इसमें यात्रा तैयारियों के हिसाब से विलंब होना भी समिति के हित में नहीं है। अब देखना यह है कि शासन इस मामले में किस तरह के कदमों के साथ आगे बढ़ता है। इस पर ही सीईओ पद पर तैनाती हो पाएगी। फिलहाल देश की प्रतिष्ठित बीकेटीसी अधिकारियों बिना भगवान भरोसे चल रही है।

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