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गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड भोजन माता कामगार यूनियन की ओर से सोमवार को चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना दिया गया। साथ ही धरने के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को भेजा गया है।

भोजन माता कामगार यूनियन की ब्लाॅक अध्यक्ष विजया डंगवाल का कहना है कि भोजन माताऐं एक लंबे समय से विद्यालयों में बच्चों का भोजन बनाने से लेकर परोसने तक का काम कर रही है। लेकिन एक लंबे समय से भोजन माताओं को राज्य कर्मचारी घोषित करने और उचित मानदेय दिए जाने की मांग की जा रही है किंतु इस पर सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। उल्टा विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण बंद हो रहे विद्यालयों से उन्हें हटाया जा रहा है जो उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अधिकांश भोजन माताऐं गरीब परिवारों से आती है और उनकी आर्थिकी का एक मात्र जरिया भोजन माता को मिलने वाला मानदेय ही है। ऐसे में यदि इनको हटा दिया जाता है तो उनकी आर्थिकी पर भी इसका विपरित प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि भोजन माताओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए और जब तक राज्य कर्मचारी घोषित नहीं किया जाता तब तक उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी जाए, उनका मानदेय 24 हजार रुपया प्रतिमाह किया जाए, भोजन माताओं को हटाया न जाए और छात्र संख्या कम होने पर जिस तरह से स्कूल बंद होने पर शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में संबंद्ध किया जा रहा है उसी तरह भोजन माताओं को भी संबंद्ध किया जाए, भोजन माताओं को माह जून का वेतन दिया जाए तथा सेवानिवृत्ति पर दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाए। धरना देने वालों में ब्लाॅक अध्यक्ष विजया डंगवाल, सचिव उषा देवी, मीना देवी, सुमंला, दमयंती, विशाखा, जानकी, सरस्वती, सीटू के जिलाध्यक्ष मदन मिश्रा, किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष भूपाल सिंह रावत आदि मौजूद थे।

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