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गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ धाम में हाल में हुए आयोजनों को लेकर उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ ने आपत्ति जताई है। ज्योतिर्मठ शंकराचार्य मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले में हस्तक्षेप करने और तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा के अनुरूप आयोजन सुनिश्चित करने की मांग की है।

बुधवार को जारी बयान में स्वामी गिरि ने कहा कि बदरिकाश्रम की परंपरा शांति, संयम और साधना से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अराइवल प्लाजा के समीप हुए एक आयोजन में तेज ध्वनि वाले डीजे और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं, जिन्हें उन्होंने बदरीनाथ धाम की धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं माना। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, वेशभूषा, खान-पान और सेना के शौर्य से जुड़े कार्यक्रमों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन तीर्थ क्षेत्र की प्रकृति को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मठ ने कपाट खुलने से पहले स्थानीय सैन्य अधिकारियों और आयोजकों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। बयान में कहा गया है कि बदरीनाथ जैसे धार्मिक स्थल पर होने वाले आयोजनों में परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

स्वामी गिरि ने कहा कि तेज ध्वनि और शोर वाले आयोजनों से तीर्थ के शांत वातावरण पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से ऐसे आयोजनों के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की है, ताकि धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने बदरीनाथ धाम और अन्य तीर्थ क्षेत्रों में तेज ध्वनि, डीजे और बड़े आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन की शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

अपने बयान में स्वामी गिरि ने तीर्थ क्षेत्रों में नए निर्माण, योजनाओं और बड़े आयोजनों से पहले शंकराचार्य से परामर्श और मार्गदर्शन लेने की व्यवस्था की मांग भी की गई है। कहा कि तीर्थ क्षेत्रों का विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक प्रकृति का संरक्षण भी किया जाना चाहिए।

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By admin

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