गोपेश्वर (चमोली)। हिन्दुओं के प्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर में धर्माधिकारी समेत वेदपाठियों की नियुक्ति न होने से पूजा तथा भोग व्यवस्था भी राम भरोसे चल रही है। इसके चलते बदरीनाथ का पूजा अधिष्ठान खाली चलने के कारण भविष्य के लिए संकट का संकेत दे रहा है। दरअसल बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी कुशलानंद सती 2011 में सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद वेदपाठी भुवन उनियाल को पदोन्नति के जरिए धर्माधिकारी के पद पर तैनात कर दिया गया। वह इस पद का बेहतर निर्वहन कर 2022 में सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद राधाकृष्ण थपलियाल को धर्माधिकारी के पद पर प्रभारी के तौर पर तैनाती दे दी गई। वह प्रभारी धर्माधिकारी के रूप में काम कर ही रहे थे कि सितंबर 2024 में वे भी सेवानिवृत्त हो गए। इस पद पर अन्य कोई वेदपाठी न होने के चलते उन्हें ही एक साल का सेवा विस्तार दे दिया गया। उनका सेवा विस्तार पिछले साल सितंबर माह में समाप्त हो गया। इसके चलते अब भी धर्माधिकारी का पद खाली पड़ा हुआ है। वेदपाठी के पद पर भी फिलहाल रघुनाथ कृति संस्कृत विद्यालय से एक शिक्षक की तैनाती की गई है। यह शिक्षक भी यात्रा काल में अपने दायित्व का निर्वहन कर वापस विद्यालय चले जाते हैं। कहा जा सकता है कि भोग तथा पूजा अर्चना की व्यवस्था के लिए वेदपाठियों की नियुक्ति न होने से पूजा अर्चना और भोग व्यवस्था पर संकट गहराने लगा है। इसके बावजूद वेदपाठियों की नियुक्ति की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने 2018 में वेदपाठी के रिक्त दो पदों के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए थे। इसके बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। बीकेटीसी ने फिर 8 अगस्त 2024 को वेदपाठियों के पदों के लिए नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया। इसके लिए 30 अगस्त 2024 तक की तिथि निर्धारित की गई। साक्षात्कार के लिए 24 सितंबर 24 को तिथि निर्धारित की गई। इसके बावजूद दो साल गुजर जाने के बावजूद अभी तक भी नियुक्ति नहीं हो पाई। इन पदों के लिए कई उम्मीदवारों ने आवेदन किया था किंतु अभी तक कोई भी नियुक्ति न होने से अब आवेदक ही उम्र पार करने की ओर बढ़ गए हैं। इस मामले में नौ आवेदकों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की है। आवेदक अतुल डिमरी, सुधाकर उनियाल, प्रशांत डिमरी, प्रियांशु सती, मनीष पांडे, चंद्रमणि, रूपेश जोशी, सौरभ कोठियाल, शशिभूषण नौटियाल तथा हिमांशु बहुगुणा की ओर से बीकेटीसी अध्यक्ष को पत्र लिखा गया और साक्षात्कार के जरिए नियुक्ति का आग्रह किया गया है। वेदपाठी के लिए सीधी भर्ती से चयन प्रक्रिया के तहत शैक्षिक योग्यता अनुभव तथा स्वर परीक्षण, कंठ परीक्षण, व्याकरण इत्यादि निर्धारित गुणवत्ता अंकों के आधार पर श्रेष्ठता क्रमानुसार करने का प्रावधान किया गया था। इसके तहत गुणात्मक अंकों के तहत पूर्व मध्यमा/हाईस्कूल के लिए अधिकतम 10 अंक, उत्तर मध्यमा/इंटरमीडिएट के लिए 20, शास्त्री उपाधि/स्नातक को 30, आचार्य/स्नातकोत्तर को 40, अनुभव पर 10, पीएचडी/एमफिल उपाधि पर 10, स्वर, कंठ परीक्षण तथा व्याकरण उच्चारण पर 30 अंकों का प्रावधान किया गया था। वेदपाठी के 4 पदों पर नियुक्ति होनी थी किंतु यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
धर्माधिकारी के पद पर कार्यरत राधाकृष्ण थपलियाल को केदारनाथ मंदिर से बदरीनाथ मंदिर में तैनात किया गया और इसके बाद उन्हें प्रभारी का दायित्व दिया गया था। उनकी सेवानिवृति और सेवा विस्तार के बाद फिलहाल धर्माधिकारी के पद पर तैनाती का मामला भी लटका पड़ा है।
बताया जा रहा है कि बीकेटीसी पिछले दो साल से आवेदन पत्रों के आधार पर नियुक्ति करने से एक तरह से पल्ला झाड़ रही है। कहा जा रहा है कि यदि इन नियुक्तियों को कर्मचारी चयन आयोग को भेजा जाता है तो फिर यहां आरक्षण का पेंच फंस जाएगा। इसके चलते ही सीधी भर्ती के फार्मुले अब तक नियुक्ति प्रक्रिया संपादित होती रही है। इस तरह वेदपाठियों की नियुक्ति न होने से बीकेटीसी द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षकों को ही कामचलाऊ व्यवस्था के तहत वेदपाठियों की व्यवस्था की जा रही है। इससे शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। अब देखना यह है कि इस मामले में सरकार आगामी 23 अप्रैल को खुलने जा रहे बदरीनाथ मंदिर के कपाट की भोग तथा पूजा व्यवस्थाओं के संचालन के लिए किस तरह के कदमों के साथ आगे बढ़ती है। इस पर ही बदरीनाथ मंदिर की पूजा और भोग व्यवस्था का भविष्य निर्भर करेगा।

