लाता में रात-दिन मशीनों से खनन और धौली नदी की धारा बदलने का आरोप
वन पंचायत की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन में खनन को लेकर लाता के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने खनन पट्टे की शर्तों के विपरीत भारी मशीनों से रात-दिन खनन किए जाने और धौली नदी की धारा से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। इस संबंध में वन पंचायत लाता, युवक मंगल दल और महिला मंगल दल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर खनन पर रोक लगाने और वन पंचायत की जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
वन पंचायत सरपंच रेशमा देवी का कहना है कि ग्रामसभा लाता में स्वीकृत खनन पट्टा चुगान और टिपान के लिए है, लेकिन खनन कारोबारी कथित तौर पर निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर बड़ी मशीनों से खनन कर रहे हैं। इससे धौली नदी की प्राकृतिक धारा भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन कारोबारी अपनी सुविधा के अनुसार बार-बार नदी की दिशा बदल रहे हैं, जो क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
उन्होंने मांग की है कि खनन कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों और ग्रामसभा की मौजूदगी में संयुक्त सीमांकन कराया जाए। इसके बाद ही निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुसार खनन की अनुमति दी जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन का विरोध करने पर युवक मंगल दल के सदस्यों को झूठे मुकदमों में फंसाने और वाहन से कुचलने तक की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने वन पंचायत लाता की भूमि पर भी अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिना अनुमति धर्मकांटा, मजदूरों के रहने के लिए भवन, शौचालय और टिनशेड कार्यालय का निर्माण किया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाने की मांग की है। चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामवासी स्वयं अतिक्रमण हटाने को बाध्य होंगे।
ज्ञापन के माध्यम से युवक मंगल दल अध्यक्ष उमेश, महिला मंगल दल अध्यक्ष देवकी देवी ने प्रशासन से मामले की तत्काल जांच कर खनन की अनियमितताओं और वन पंचायत की भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
