राष्ट्रीय दलों ने प्रत्याशी चयन पर साधी चुप्पी
उक्रांद ने 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर शुरू की चुनावी तैयारी
गोपेश्वर (चमोली)। जहां एक ओर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अभी प्रत्याशियों के चयन पर मंथन में जुटी हैं, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने चमोली जिले की कर्णप्रयाग सीट से अपना चुनावी दांव चल दिया है। पार्टी ने युवा नेता आशीष नेगी को प्रत्याशी घोषित कर जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक पर चुनावी तैयारी का आगाज कर दिया है। प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 16 पर पहली सूची जारी कर उक्रांद ने राष्ट्रीय दलों से पहले मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई है।
कर्णप्रयाग सीट को लेकर उक्रांद की यह पहल केवल प्रत्याशी घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पार्टी ने राष्ट्रीय दलों से पहले चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का प्रयास किया है। अब आशीष नेगी को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए काफी समय मिलेगा। वे क्षेत्र में जनसंपर्क, संगठन विस्तार और स्थानीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाने पर काम कर सकते हैं। उक्रांद नेतृत्व ने भी घोषित प्रत्याशियों को घर-घर जाकर पार्टी के एजेंडे से मतदाताओं को अवगत कराने की अपील की है।
हालांकि कर्णप्रयाग में भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। 2022 में भाजपा के अनिल नौटियाल को 28,911 और कांग्रेस के मुकेश नेगी को 22,196 वोट मिले थे, वहीं उक्रांद के प्रत्याशी उमेश खंडूड़ी को महज 464 वोट मिले। यह आंकड़ा बताता है कि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पुरानी सीमित चुनावी मौजूदगी को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की होगी।
उक्रांद की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पार्टी ने चुनाव से काफी पहले प्रत्याशी घोषित कर उन्हें तैयारी का समय दिया है। लेकिन केवल पहले प्रत्याशी घोषित कर देना चुनावी जमीन तैयार होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय मुद्दों पर लगातार संघर्ष जरूरी होगा। कर्णप्रयाग में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर पार्टी को अपना स्पष्ट पक्ष जनता के बीच रखना होगा।
दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के लिए भी यह घोषणा एक संकेत है कि चुनावी मुकाबला केवल दो राष्ट्रीय दलों के बीच सीमित रहने की स्थिति नहीं है। उक्रांद की मौजूदगी से क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक विमर्श का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका असर किस दल के मतों पर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। यह प्रत्याशी की सक्रियता, संगठन की ताकत और चुनाव के समय बनने वाले राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
चमोली की बदरीनाथ और थराली सीटों पर उक्रांद ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। ऐसे में जिले में पार्टी की आगे की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दूसरी सूची में इन सीटों पर भी मजबूत चेहरे सामने आते हैं तो उक्रांद जिले में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी चुनावी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर सकती है। फिलहाल कर्णप्रयाग से आशीष नेगी की घोषणा ने चुनावी चर्चा को समय से पहले शुरू कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस के लिए अब प्रत्याशी चयन के साथ ही क्षेत्रीय दलों की सक्रियता को भी अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।
