संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर एमएससी के छात्र जुटा रहे शोध संबंधी जानकारियां
गोपेश्वर (चमोली)। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ, पहाड़ों की संरचना में समय के साथ किस तरह बदलाव आते हैं और भूगर्भीय हलचलें मानव जीवन व पर्यावरण को कैसे प्रभावित करती हैं, इन सवालों के जवाब अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के विद्यार्थी किताबों के बजाय धरातल पर तलाश रहे हैं। भूगर्भ विज्ञान विभाग के एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का दल इन दिनों चमोली से जोशीमठ के बीच विभिन्न संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर हिमालय की भूगर्भीय संरचना और पर्वत निर्माण की प्रक्रिया का अध्ययन कर रहा है।
फील्ड स्टडी के दौरान विद्यार्थी चट्टानों की बनावट, पर्वतों की संरचना और भूगर्भीय बदलावों का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में धरती के भीतर होने वाली हलचलों और उनके प्रभावों को समझना अध्ययन का प्रमुख हिस्सा है। विद्यार्थी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि भूगर्भीय गतिविधियां पहाड़ों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं। स्थलीय निरीक्षण से उन्हें शोध के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल रही हैं।
छात्रा मीनाक्षी के अनुसार, कक्षाओं में पढ़े गए सिद्धांतों को पहाड़ों और चट्टानों के बीच प्रत्यक्ष देखना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। इससे हिमालय की संरचना और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल रही है।
भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार ने बताया कि भूगर्भ विज्ञान को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसके लिए फील्ड विजिट और स्थलीय निरीक्षण जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाकर हिमालय के निर्माण और उसकी भूगर्भीय संरचना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी टकराव, उनकी गति और उससे पैदा होने वाली भूगर्भीय गतिविधियों के बारे में भी विद्यार्थियों को समझाया जा रहा है। साथ ही इन प्रक्रियाओं का पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता, पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कराया जा रहा है।
