कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला, भाजपा नेता राजेंद्र भंडारी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के गृह क्षेत्र की सड़क बदहाल
गोपेश्वर (चमोली)। देवखाल से पोखरी तक गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग पर सफर करना ग्रामीणों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है, यह पहचानना मुश्किल हो गया है। जगह-जगह उखड़े डामर और गहरे गड्ढों के बीच वाहन हिचकोले खाते हुए गुजरते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है, जबकि कार और अन्य छोटे वाहनों को भी संभलकर निकलना पड़ता है। सड़क की बदहाली से सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ती है, जिन्हें रोजमर्रा के काम, इलाज, पढ़ाई और बाजार के लिए इसी मार्ग से आवाजाही करनी पड़ती है।
ग्रामीणों के लिए यह महज खराब सड़क का मामला नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी समस्या है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत होती है तो स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को भी समय पर गंतव्य तक पहुंचने की चिंता रहती है। सड़क पर सफर के दौरान वाहन क्षतिग्रस्त होने और दुर्घटना का खतरा अलग बना रहता है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को हर दिन जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।
तीन प्रमुख नेताओं का क्षेत्र, फिर भी बदहाल सड़क
सड़क की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है, क्योंकि यह क्षेत्र कई प्रमुख राजनीतिक चेहरों का गृह क्षेत्र है। बदरीनाथ के कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला पोखरी क्षेत्र के निवासी हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान में भाजपा नेता राजेंद्र भंडारी का गृह क्षेत्र भी पोखरी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का संबंध भी इसी क्षेत्र से है। इसके बावजूद देवखाल से पोखरी तक सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। ग्रामीणों के बीच सवाल है कि जब क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों तक लोगों की पहुंच है, तो उनकी रोजमर्रा की इस परेशानी का समाधान कब होगा?
एक ही सड़क पर दो तस्वीरें
करीब 66 किलोमीटर लंबे गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग का गोपेश्वर से देवखाल तक का हिस्सा लोक निर्माण विभाग गोपेश्वर के अधीन है। यहां हाल में डामरीकरण किया गया है। इसके आगे देवखाल से पोखरी तक सड़क लोक निर्माण विभाग पोखरी डिवीजन के अधीन है, लेकिन इस हिस्से की हालत बदहाल बनी हुई है। एक ही मार्ग पर दो अलग-अलग स्थितियां विभागीय कार्यों की प्राथमिकता पर भी सवाल खड़े करती हैं।
एक नवंबर की समयसीमा पर टिकी निगाहें
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सड़कों को अक्टूबर तक गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एक नवंबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें इस तारीख पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद इस बार सड़क के गड्ढों से राहत मिल जाए। हालांकि, लंबे समय से बनी समस्या को देखते हुए लोगों में संशय भी है।
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क पर केवल अस्थायी पैचवर्क तक सीमित न रहा जाए, बल्कि क्षतिग्रस्त हिस्सों का स्थायी सुधारीकरण किया जाए। संबंधित विभाग सड़क की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करे, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके। अब देखना यह है कि गड्ढामुक्त सड़क बनाने की समयसीमा देवखाल-पोखरी मार्ग पर भी जमीन पर उतरती है या ग्रामीणों को बदहाल सड़क पर सफर करने के लिए फिर इंतजार करना पड़ेगा।
