गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले के पोखरी ब्लाॅक की विजया देवी खेती के साथ स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रही हैं। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से वह सब्जी, फूल और कीवी का उत्पादन कर रही हैं। कीवी से जैम और अचार बनाकर भी आय बढ़ा रही हैं। एकीकृत कृषि मॉडल के जरिए वह प्रतिमाह करीब 25 हजार रुपये कमा रही हैं।
विजया देवी ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन, पुष्प उत्पादन, एग्रोफोरेस्ट्री और कीवी की खेती को अपनाया है। अलग-अलग कृषि गतिविधियों से उन्हें आय के कई स्रोत मिले हैं। सालभर सब्जियों का उत्पादन नियमित आमदनी में मदद कर रहा है, जबकि फूलों और कीवी से अतिरिक्त आय हो रही है।
खेती को लाभकारी बनाने के लिए उन्होंने कीवी प्रसंस्करण भी शुरू किया है। कीवी से जैम और अचार तैयार कर वह कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर रही हैं। इससे ताजे फल की बिक्री के साथ प्रसंस्कृत उत्पादों के जरिए भी कमाई का अवसर मिला है।
ग्रामोत्थान परियोजना के तहत विजया देवी को 75 हजार रुपये की सहायता राशि और 1.50 लाख रुपये का ऋण मिला। उन्होंने अपने संसाधनों से 93,500 रुपये का निवेश कर कृषि गतिविधियों का विस्तार किया। कृषि प्रबंधन, एकीकृत खेती और मूल्य संवर्धन से जुड़े प्रशिक्षणों से भी उन्हें काम आगे बढ़ाने में मदद मिली।
विजया देवी अब कीवी से तैयार होने वाले उत्पादों का विस्तार करने और अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करने की योजना बना रही हैं। उनका प्रयास खेती को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित रखने के बजाय आय और स्वरोजगार का स्थायी साधन बनाना है।
