खबर को सुनें

गोपेश्वर (चमोली)। कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी के विस्तार में चमोली जिले के ब्राह्मणों की अनदेखी की गई है। इसके चलते अंदर ही अंदर असंतोष की प्रतिध्वनि भी सुलगने लगी है।

दरअसल कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी का ऐन चुनाव तैयारियों के बीच विस्तार कर लिया गया है। एक तरह से प्रदेश कार्यकारिणी को जंबोजेट बना दिया गया है। पदाधिकारियों की फेहरिस्त को देखते हुए इस बात के संकेत मिले हैं कि तमाम नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर एडजस्ट करने की कोशिश की गई है। इसके बावजूद चमोली जिले में राजपूतों तथा दलितों को प्रदेश कार्यकारिणी में जगह तो मिली है किंतु ब्राह्मणों को दरकिनार किया गया है। प्रदेश कार्यकारिणी में बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र से जोशीमठ की पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी शाह तथा चमोली के सुदर्शन शाह को प्रदेश सचिव बनाया गया है। कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से पूर्व जिलाध्यक्ष व विधानसभा का चुनाव लड चुके मुकेश नेगी को  भी सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। थराली विधानसभा क्षेत्र से शेखर पल्लव, संदीप पटवाल, विजेंद्र रावत तथा पूर्व जिलाध्यक्ष बीरेंद्र रावत को प्रदेश सचिव का पद सौंपा गया है। इस तरह प्रदेश कार्यकारिणी में ब्राह्मण दावेदारों की अनदेखी की गई है।

कांग्रेस की सियात में दखल रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की अनदेखी किसी के गले नहीं उतर पा रही है। हालांकि कतिपय विश्लेषकों का तर्क है कि जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ब्राह्मण कोटे से हैं तो इसी लिए ब्राह्मणों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसके इतर तमाम ब्राह्मण दावेदारों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत उनकी अनदेखी की गई है। वैसे कतिपय लोगों का कहना है कि प्रदेश कार्यकारिणी में विधानसभा का चुनाव न लड़ने वाले नेताओं को तरजीह दी गई है। इसके बावजूद पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी इस बार भी कर्णप्रयाग से चुनाव लड़ने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनका नाम भी प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल होने से तमाम तरह की आशंकाओं को बल मिल रहा है। चमोली जिले में तो बदरीनाथ सीट की कांग्रेस की झोली में है। कर्णप्रयाग तथा थराली सीटों पर भाजपा ही काबिज है। ऐसे में अभी भी सांगठनिक दृष्टि से कर्णप्रयाग को कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। अलबत्ता थराली को इन दोनों के मुकाबले अच्छा प्रतिनिधित्व दिया गया है। वैसे कांग्रेस के तमाम सक्रिय कार्यकर्ता भी लाइन में लगे थे किंतु उन्हें भी प्रदेश कार्यकारिणी में जगह नहीं दी गई। इसके चलते ब्राह्मणों के अलावा अन्य सक्रिय दावेदार भी अंदर ही अंदर नाराज हो चले हैं। आने वाले दिनों में अंदर ही अंदर सुलग रही असंतोष की चिंगारी क्या गुल खिलाती है इस पर सबकी नजरें टिक गई है।

हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें

By admin

Leave a Reply

error: Content is protected !!