थराली (चमोली)। थराली विकास खंड के गोठिंडा गांव में बारिश के बीच हुए प्रसव को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सरकारी विज्ञप्ति अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सूचना विभाग की ओर से जारी आधिकारिक बयान में जहां स्वास्थ्य टीम की ओर से रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराने का दावा किया गया, वहीं प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने पूरी कहानी पर संदेह खड़ा कर दिया है।
विज्ञप्ति में कहा गया था कि दुर्गम मार्ग और भारी बारिश के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर मौके पर पहुंची और रास्ते में ही प्रसव कराया। लेकिन स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद लोगों के दावे इससे बिल्कुल अलग हैं।
प्रसुता को गांव से प्रसव स्थल तक ले जाने वाले टैक्सी चालक बिरेंद्र सोनी ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि प्रसव उनकी माता किशनी देवी ने कराया था, जो पहले दाई का कार्य कर चुकी हैं। उनके अनुसार प्रसव सुबह करीब 8ः05 बजे हो चुका था, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब साढे दस बजे मौके पर पहुंची। उनके अनुसार टीम ने प्रसव के बाद जच्चा और नवजात को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन सुरक्षित प्रसव कराने का श्रेय सरकारी विज्ञप्ति में विभाग ने स्वयं ले लिया। यानी टीम के पहुंचने से पहले ही प्रसव हो चुका था। इसी तरह आशा कार्यकर्ता मीना देवी और ग्रामीण नरेंद्र कुमार ने भी यह स्पष्ट किया है कि प्रसव प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी और स्वास्थ्य टीम बाद में मौके पर पहुंची। इन विरोधाभासी दावों के बाद सरकारी विज्ञप्ति की सत्यता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा है कि जो सूचना थराली से प्राप्त हुई, उसी के आधार पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि तथ्यों में भिन्नता पाई जाती है तो पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी।
अब यह मामला सिर्फ एक प्रसव का नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है, जिस पर निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
