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गोपेश्वर (चमोली)।  उत्तराखंड के जंगलों के आग की लपटों में धधकने के चलते वातावरण में गहरी धुंध छा गई है। इसके चलते उत्तराखंड के सौंदर्य और खूबसूरती पर वनाग्नि का ग्रहण लग गया है। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों को भी उत्तराखंड की शुद्ध आवोहवा नसीब नहीं हो पा रही है।

दरअसल हर साल उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होते ही जंगलों के आग के हवाले होने की घटना आम हो जाती हैं। इस साल भी मई माह के दूसरे सप्ताह से यात्रा ने रफ्तार पकड़ी ही थी कि जंगल भी आग की लपटों से धधकने लगे हैं। यह सिलसिला अभी तक धमने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे वातावरण में इस तरह धुंध छा गई है कि यहां की खूबसूरती लोगों को नसीब ही नहीं हो रही है। इस बीच अकेले चमोली जिले में वनाग्नि की चपेट में आने से 2 लोगों की मौत हो गई। बिरही में फायर वाचर तथा आदिबद्री के समीप बूंगा गांव में एक महिला की आग की जद में आने से असमय मौत से परिजन संभले नहीं संभल पा रहे हैं।

उत्तराखंड में हर साल फायर सीजन की शुरूआत होते ही जंगलों का आग के हवाले होना नियति सी बन गई है। एक ओर समूचा विश्व जलवायु परिवर्तन के कारण हैरान परेशान है। असमय ऋतु परिवर्तन के इस दौर में मौसम का मिजाज भी लगातार बदलता जा रहा है। इस  बार जाड़ों में बर्फवारी और बारिश न होने से लोग हैरान परेशान रहे तो अप्रैल के आखिरी सप्ताह और मई के शुरूआती दौर में बर्फवारी और बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। इसके तत्काल बाद भीषण गर्मी से लोग तड़फते जा रहे हैं। इसी बीच जंगलों में लगी आग ने गर्मी से बेहाल लोगों की मुसीबतें और बढ़ाकर रख दी हैं। खास कर चमोली तथा रूद्रप्रयाग के जंगल वनाग्नि की भेंट चढ़ जाने से राहत मिलने की उम्मीदें भी चकनाचूर होती जा रही है। महाराष्ट्र से केदारनाथ होते हुए बदरीनाथ भगवान के दर्शनों को जा रही एक महिला तीर्थयात्री का कहना था कि वह शुद्ध पर्यावरण, नैसर्गिक छटा, हिमालय की खूबसूरती तथा गर्मी से छुटकारा पाने के लिए उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर आई है। यहां के जंगलों के आग में धधकने से न तो उन्हें यहां की आबोहवा का लाभ मिल पा रहा है न ही हिमालय की खूबसूरती का दीदार हो पा रहा है। यह स्थिति हिमालय के संदर्भ में बेहद चिंताजनक है। साफ तौर पर कहा जा सकता है कि तीर्थ यात्री और पर्यटक इस बार हिमालय की खूबसूरती का  दीदार नहीं कर पा रहे हैं।

उत्तराखंड राज्य की देहरादून स्थित अस्थाई राजधानी तमाम बडे़ महकमें स्थापित हैं। इसके बावजूद वनाग्नि को रोकने के लिए कहीं से भी कोई खास पहल होती नहीं दिखाई दे रही है। यह स्थिति चिंता के रूप में सामने आ रही है। ग्लोबल वार्मिंग का असर हिमालय के उच्च शिखरों तक भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। हाल ही में उच्च हिमालय में स्थित बदरीनाथ के समीप कंचन गंगा में यकायक हिमस्खलन से इस बात के संकेत मिले हैं कि उच्च हिमालय भी अब ग्लोबल वार्मिंग की जद में आ गए है। इस तरह के हालात पूरे देश के लिए चिंता का सबब बनते जा रहे हैं। यदि वनाग्नि को रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई तो हिमालयी राज्य उत्तराखंड का भविष्य भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। इसलिए सभी लोगों को हिमालय की खूबसूरती को बचाने के लिए वनाग्नि पर नियंत्रण के प्रयासों को आगे बढ़ाना होगा। ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य के खतरे कम नहीं हैं।

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By admin

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