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गोपेश्वर (चमोली)। माता अनसूया देवरा यात्रा के तहत खल्ला गांव में आयोजित लक्ष यज्ञ तथा श्रीमद् देवी भागवत कथा में कथा व्यास मनोज चमोली ने गंगा पुत्र भीष्म पितामह की महान भीष्म प्रतिज्ञा का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने आदर्श पुत्र का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

दशोली ब्लाॅक के खल्ला गांव में मां अनसूया देवी की देवरा यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित लक्ष महायज्ञ एवं श्रीमद देवी भागवत कथा के दौरान व्यास गद्दी से कथा वाचन करते हुए कथा व्यास मनोज चमोली ने भावपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथा में उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह ने अपने पिता की इच्छा पूर्ति के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य और सिंहासन त्याग का कठोर व्रत लिया, जो उन्हें महान बनाता है। इस दौरान उन्होंने धृतराष्ट्र और पांडु के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए उनके जन्म की परिस्थितियों और उससे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर प्रकाश डाला। साथ ही पांडवों के जन्म की कथा सुनाते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

कथा के समापन पर भगवती अनसूया और ज्वाला देवी के मंडीदीप का दिव्य वर्णन किया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुभव होने की बात कही। यज्ञाचार्य डॉ. चंद्रशेखर तिवारी ने अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन किया। इस अवसर पर पूरा खल्ला गांव माता अनसूया की भक्ति में सराबोर नजर आया।

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