गोपेश्वर (चमोली)। वामपंथी दलों ने गुरूवार को कर्णप्रयाग में एक संयुक्त प्रेस वार्ता कर कहा कि उत्तराखंड में भारी बारिश ने अनियोजित और अवैज्ञानिक विकास की पोल खोल कर रख दी है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को राहत देने में प्रदेश सरकार लापरवाह बनी हुई है।
सीपीएम के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में पहले दौर में हरिद्वार में बारिश से भारी तबाही हुई हैं दूसरे दौर में पहाड़ी जिलों में तबाही हुई। आज भी सौ से अधिक सड़कें बंद हैं, लेकिन आपदा पीड़ितों को राहत देने में उत्तराखंड सरकार का रवैया लापरवाही भरा है। वो केवल अपने कार्यकर्ताओं को राहत देने तक सीमित है। हिमाचल प्रदेश में उत्तराखंड से अधिक तबाही हुई, लेकिन केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश की मदद नहीं कर रही है क्योंकि वहां विपक्षी पार्टी की सरकार है। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी स्थिति में ऐसा संकीर्ण नजरिया अमानवीय है, निंदनीय है। उत्तराखंड में तबाही के बाद दी जाने वाली राहत अपर्याप्त है। सरकार को नये सिरे से मुआवजे, विस्थापन और पुनर्वास के लिए राहत राशि और नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तीन वामपंथी पार्टियां भाकपा, माकपा, भाकपा(माले) आपदा से जुड़े मसलों पर पांच सितंबर को उत्तराखंड के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देंगी।
पत्रकार वार्ता में भाकपा माले के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड में भारी बारिश ने अनियोजित और अवैज्ञानिक विकास की पोल खोल दी है। चार धाम सड़क जिसे पहले आल वेदर रोड कहा गया, वो पूरी तरह क्षत-विक्षत हो कर दूरस्थ इलाके की अधूरी बनी सड़क जैसी नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि 155 भूस्खलन जोन के उपचार के लिए 971 करोड़ रुपया देगी। इस सड़क पर 12 हजार करोड़ रुपए खर्च करके 155 भू स्खलन जोन बने और अब उन पर 971 करोड़ रुपया खर्च होगा। सड़क और सार्वजनिक धन को मलबे में तब्दील कर नदी में डालने के इस काम को विकास कहा जा रहा है। कर्णप्रयाग से ग्वालदम तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध रूप से पेड़ काटने के लिए एनजीटी ने बीआरओ को एक महीने में दस हजार पेड़ लगाने का आदेश दिया है। सवाल है कि बाकी राजमार्ग को तबाह करने वालों को सजा कौन देगा। स्मार्ट सिटी के सारे दावे एक बारिश में उड़ गए। उन्होंने कहा कि जोशीमठ का पुनर्वास नहीं हो सका, लेकिन मुख्यमंत्री का जोर जून के महीने में खनन की अनुमति हासिल करने पर रहा। एक तरफ आपदा की मार है, दूसरी ओर अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों की आजीविका पर डबल इंजन के बुलडोजर का प्रहार हो रहा है। जिसे सहन नहीं किया जाएगा। और इसके लिए जनता को भी आगे आने की जरूरत है।

