थराली (चमोली)। जंगलों को दवानल से बचाने के तहत बीते शुक्रवार को चमोली जिले के नारायणबगड़ विकास खंड से शुरू की गई पदयात्रा सोमवार को ब्लाक मुख्यालय थराली पहुंची जहां पर यात्रा का समापन किया गया। इस मौके पर नगर पंचायत सभागार में एक बैठक भी आयोजित की गई जिसमें दवानल के फैलने, इसे रोके जाने एवं नुकसान को कम-से-कम करने के प्रयासों पर चर्चा की गई।
सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केन्द्र के साथ ही पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले उसके सहयोगी संगठनों की ओर से जंगलों को दवानल से बचाने के लिए चलाई जा रही चार दिवसीय जन-जागरूकता पदयात्रा गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे ने कहा कि वन हमारे सुरक्षित जीवन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। बिना इसके मानव सहित अन्य जीव जंतुओं का जीवन संभव ही नही है। अगर वन नष्ट हो जाते हैं तों जीवन भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग एवं सरकार प्रति वर्ष वनों को दवानल से बचाने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करती हैं। किंतु इन प्रयासों को तब झटका लगना शुरू हो जाता हैं जब इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग नही मिल पाता हैं। उन्होंने कहा कि बिना स्थानी ग्रामीणों के सहयोग के जंगलों को दवानल से नही बचाया जा सकता हैं। उन्होंने जनता से जंगलों को आग से बचाने के लिए आगे आने की अपील की। इस मौके पर थराली की नगर पंचायत अध्यक्ष दीपा भारती ने साल दर साल जंगलों में दवानल के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए इसे रोकने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करने की बात पर बल दिया। मध्य पिंडर रेंज थराली के वन क्षेत्राधिकारी हरीश थपलियाल, अलकनंदा भूमि संरक्षण के वन क्षेत्राधिकारी रवींद्र निराला, जागो हिमालयन समिति के निदेशक रमेश थपलियाल ने कहा कि 95 फीसदी से अधिक दवानल के मामले मानवीय भूलों एवं अज्ञाता के कारण होती हैं जिन्हें जनचेतना के बलबूते रोका जा सकता हैं। वृक्ष मित्र हरीश सोनी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृहद रूप से पौधरोपण किए जाने के साथ ही जंगलों को दवानल से बचने के लिए आम जनता को जागरूक करने पर बल दिया।
वन पंचायत संगठन के प्रदेश संयोजक गोविंद सोनी ने कहा कि वन पंचायत को पूरा अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है जिससे वन पंचायतें अपने आस-पास के वन क्षेत्रों को भी दवानल से सुरक्षित रख सके। पूर्व जिपंस गोदांबरी रावत वन पंचायत सरपंच महिपाल सिंह रावत, राजेन्द्र रावत पर्यावरण मित्र हरीश चन्द्र सोनी ने महिलाओं को वनों के प्रति अधिक से अधिक जागरूक करने के साथ ही उन्हें आग बुझाने की वैधानिकता तकनीकी की जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर सीपी भट्ट पर्यावरण के पद यात्री विनय सेमवाल एवं मंगला कोठियाल ने पद यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज अधिकांश लोग जंगलों में लगने वाली आग के प्रति काफी चिंतित हैं। किंतु उन्हें जंगलों में फैलने वाली दवानल को रोकने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की जानकारी देना बेहद जरूरी हैं। ताकि समय आने पर वें उस तकनीक का प्रयोग कर दवानल पर नियंत्रण कर सकें।

