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सिमली (चमोली)। गैरसैण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाये जाने की मांग को लेकर गोपेश्वर से गैरसैण तक की जा रही नंगे पांव पदयात्रा मंगलवार को अपने विभिन्न पड़ावों से होते हुए आदिबद्री पहुंच गई है।

एक राज्य एक राजधनी गैरसैण को लेकर की जा रही  पदयात्रा के आदिबद्री पहुंचे से पहले सिमली में एक जनसभा की गई जिसमें बोलते हुए नंगे पांव पदयात्रा कर रहे प्रवीण काशी ने पहाड की पीड़ा, दुःख दर्दों का समाधान गैरसैंण राजधानी बताया, एक राज्य राजधानी, पहाड़ी राज्य की राजधानी गैरसैंण को विकास का मार्ग बताया, दो-दो राजधानियों को जनता के टैक्स की लूट बताया। उन्होंने कहा कि सात-आठ दिसम्बर को गैरसैण में आहूत विधान सभा सत्र में सरकार को घेरकर गैरसैंण राजधानी बनाने के लिए विवश किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि ग्राष्मकालीन राजधानी में शीतकालीन सत्र चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यहां दो दिन का सत्र चलाने नहीं बल्कि सैर सपाटे के लिए आ रही है। और हमारे टैक्स के लाखों रुपये अपने सैरर सपाटे पर खर्च कर लौट जायेगी और आने वाले विधान सभा चुनाव में जनता के सामने कहेगी की हमने शीतकाल में भी गैरसैण में विधान सभा सत्र कर एक कदम और आगे बढ़ाया है ताकि जनता इनके छलावे में आ सके। उन्होंने कहा कि अब यहां कीी जनता को छला नहीं जा सकता है। जब तक गैरसैण को स्थायी राजधानी नहीं बनाया जाता तब हमको और कुछ मंजूर नहीं है।  सभा को दीपक फरस्वाण, अरविन्द हटवाल, मोहित कुकरेती, अंशी बिष्ट, भारती मिंगवाल, सुशील कुमार डिमरी, सुरेन्द्र सिंह रावत आदि ने सम्बोधित किया। संचालन बीरेंद्र सिंह मिंगवाल ने किया।

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