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गोपेश्वर (चमोली)। वन अधिनियम के कारण राज्य में विधिवत स्वीकृति के 206 तथा सैद्धांतिक स्वीकृति के 713 मामले विभिन्न योजनाओं के लंबित चल रहे हैं। इस तरह कुल 909 योजनाएं वन अधिनियम की भेंट चढ़ी हुई है। विधायक खजान दास ने सवाल किया था कि राज्य में सड़कों के नवनिर्माण तथा विस्तारीकरण हेतु वन विभाग ने लोनिवि, पेयजल, विद्युत, सिंचाई, ऊर्जा आदि विभागों के कार्य प्रारंभ किए जाने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत संबंधी कितने प्रस्ताव विभागवार लंबित चल रहे हैं। इस सवाल के जबाव में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि वन (संरक्षण एवं संवर्द्धन) अधिनियम 1980 के अंतर्गत वन भूमि के गैर वानिकी कार्यों को करने के लिए भारत सरकार एवं सामरिक महत्व के प्रकरण पर राज्य सरकार द्वारा अनुमति प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि यह अनुमति दो चरणों में प्रदान की जाती है। इसके तहत प्रथम चरण में सैद्धांतिक स्वीकृति तथा द्वितीय चरण में विधिवत स्वीकृति प्रदान की जाती है। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि लोक निर्माण विभाग की 83 योजनाएं विधिवत स्वीकृति तथा 356 योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए लंबित चल रही है। पेयजल विभाग की 54 योजनाएं विधिवत स्वीकृति तथा 258 योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति की प्रत्याशा में लटकी पड़ी हैं। विद्युत विभाग की चार योजनाएं विधिवत स्वीकृति और आठ योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति पाने की इंतजारी में हैं। सिंचाई विभाग की दो योजना विधिवत स्वीकृति पाने के लिए लंबित चल रही है। ऊर्जा विभाग की सात योजनाएं विधिवत तथा पांच योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति की प्रत्याशा में लंबित पड़ी है। अन्य योजनाओं में 56 प्रकरण विधिवत स्वीकृति के लंबित पड़े हैं जबकि 86 योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति न मिलने के कारण लटकी पड़ी है। इस तरह 206 योजनाएं विधिवत तथा 713 योजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति न मिलने के कारण लंबित चल रही हैंै। विधायक ने यह भी सवाल पूछा कि इन योजनाओं में हो रहे विलंब को देखते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कोई नियत समय सीमा सरकार निर्धारित करने जा रही है। इस पर वन मंत्री ने जबाव दिया कि वन भूमि हस्तानांतरण प्रस्तावों को निस्तारित किए जाने की समय सारणी वन (संरक्षण एवं सवर्द्धन) अधिनियम 1980 यथा संशोधित-2023 के अंतर्गत भारत सरकार के द्वारा पूर्व में ही अधिसूचित हैं।

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